Advertisements
Advertisements
प्रश्न
पाठ में आए किन प्रसंगों के आधर पर आप कह सकते हैं कि -
वे वास्तविक अर्थों में एक सच्चे इनसान थे।
Advertisements
उत्तर
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ एक सच्चे और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। वे धर्म से बढ़कर मानवता को सर्वोपरि मानते थे और हिंदू तथा मुस्लिम दोनों धर्मों का समान रूप से आदर करते थे। भारत रत्न जैसी सर्वोच्च सम्मान मिलने के बावजूद उनके व्यवहार में कोई अहंकार नहीं आया। उनके लिए धन-दौलत से अधिक महत्व हमेशा अपने सुर और संगीत की शुद्धता का था।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?
सुषिर-वाद्यों से क्या अभिप्राय है?
आशय स्पष्ट कीजिए -
‘फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।’
आशय स्पष्ट कीजिए -
‘मेरे मालिक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।’
काशी में हो रहे कौन-से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे?
मुहर्रम से बिस्मिल्ला खाँ के जुड़ाव को अपने शब्दों में लिखिए।
बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे, तर्क सहित उत्तर दीजिए।
रीड क्या है? शहनाई के लिए इसकी क्या उपयोगिता है?
बिस्मिल्ला खाँ बालाजी मंदिर क्यों जाया करते थे? वे किस रास्ते से मंदिर जाया करते थे?
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ काशी विश्वनाथ जी के प्रति अपार श्रद्धा रखते हैं, स्पष्ट कीजिए।
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ काशी छोड़कर अन्यत्र क्यों नहीं जाना चाहते हैं?
आज के युवाओं को बिस्मिल्ला के चरित्र से क्या सीख लेनी चाहिए?
मंगलध्वनि किसे कहते हैं?
भारत रत्न बिस्मिल्ला खाँ पर 'सादा जीवन उच्च विचार' वाली कहावत चरितार्थ होती है, कैसे?
'क्षितिज' के गद्य पाठों के आधार निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्न का सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए -
अमीरउद्दीन को रसूलनबाई और बातूलनबाई के घरवाला रास्ता क्यों पसंद था?
'भारत रत्न' जैसे पुरस्कार से सम्मानित किए जाने का कारण बिस्मिल्ला खाँ की दृष्टि में था -
शहनाई के विषय में 'नौबत खाने में इबादत' पाठ के आधार पर निम्नलिखित में कौन-सी बात असत्य है?
