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प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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खेती-बारी के समय, गाँव के किसान सिरचन की गिनती नहीं करते। लोग उसको बेकार ही नहीं, ‘बेगार’ समझते हैं। इसलिए खेत-खलिहान की मजदूरी के लिए कोई नहीं बुलाने जाता है सिरचन को। क्या होगा, उसको बुलाकर? दूसरे मजदूर खेत पहुँचकर एक-तिहाई काम कर चुकेंगे, तब कहीं सिरचन राय हाथ में खुरपी डुलाता हुआ दिखाई पड़ेगा; पगडंडी पर तौल-तौलकर पाँव रखता हुआ, धीरे-धीरे। मुफ्त में मजदूरी देनी हो तो और बात है। आज सिरचन को मुफ्तखोर, कामचोर या चटोर कह ले कोई। एक समय था, जब उसकी मड़ैया के पास बाबू लोगों की सवारियाँ बँधी रहती थीं। उसे लोग पूछते ही नहीं थे, उसकी खुशामद भी करते थे। “अरे, सिरचन भाई! अब तो तुम्हारे ही हाथ में यह कारीगरी रह गई है सारे इलाके में। एक दिन का समय निकालकर चलो। बड़े भैया की चिट्ठी आई है शहर से - सिरचन से एक जोड़ा चिक बनाकर भेज दो।” |
- कृति पूर्ण कीजिए:
- लोग सिरचन को कहते हैं - (1)
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- लोग सिरचन को समझते हैं - (1)
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- लोग सिरचन को कहते हैं - (1)
- ‘कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
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उत्तर
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- लोग सिरचन को कहते हैं -
- मुफ्तखोर
- कामचोर
- लोग सिरचन को समझते हैं -
- बेकार
- बेगार
- लोग सिरचन को कहते हैं -
- समाज में कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि उसे करने के पीछे की मेहनत और ईमानदारी उसे महत्वपूर्ण बनाती है। हर काम का समाज को सुचारू रूप से चलाने में अपना विशेष योगदान होता है। यदि हम किसी भी छोटे से छोटे कार्य को पूरी कुशलता और लगन से करते हैं, तो वही हमारी पहचान और सम्मान का कारण बनता है। अतः हमें काम के आधार पर भेदभाव न करके हर काम करने वाले का सम्मान करना चाहिए।
