मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १० वी

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई जाके सिर मोर मुकट, मेरो पति सोई (1) (i) कन्हैया के नाम - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई

जाके सिर मोर मुकट, मेरो पति सोई

छाँड़ि दई कुल की कानि, कहा करि कोई?

संतन ढिग बैठि बैठि, लोक लाज खोई।

अँसुवन जल सींचि-सींचि प्रेम बेलि बोई।

अब तो बेल फैल गई आ द फल होई॥

दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से बिलोई।

माखन जब काढ़ि लियो छाछ पिये कोई॥

भगत देखि राजी हुई जगत देखि रोई।

दासी ‘मीरा’ लाल गिरिधर तारो अब मोही॥

  1. कृति पूर्ण कीजिए: (2)


  2. पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए:
    1. इस अर्थ के शब्द - (1)
      1. निकट - 
      2. मयूर -
    2. लिंग परिवर्तन कीजिए - (1) 
      1. पत्नी
      2. दास
  3. उपर्युक्त पद्यांश की अपनी पसंद की क्रमशः चार पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए। (2)
आकलन
Advertisements

उत्तर



      1. निकट - ढिग
      2. मयूर - मोर
      1. पत्नी - पति
      2. दास - दासी
  1. इन पंक्तियों में मीराबाई अपनी अनन्य भक्ति को व्यक्त करते हुए कहती हैं कि इस संसार में भगवान श्रीकृष्ण (गिरधर गोपाल) के अलावा मेरा और कोई अपना नहीं है। जिनके मस्तक पर मोर का मुकुट सुशोभित है, वही मेरे एकमात्र स्वामी और पति हैं। उनके प्रेम में मग्न होकर मैंने अपने कुल (वंश) की मर्यादा को भी त्याग दिया है, अब समाज चाहे जो कहे मुझे उसकी परवाह नहीं है। मैंने साधु-संतों के पास (ढिग) बैठकर समाज की झूठी लोक-लाज को पूरी तरह छोड़ दिया है और स्वयं को ईश्वर की भक्ति में समर्पित कर दिया है।
shaalaa.com
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
2025-2026 (March) Board Question Paper
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×