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प्रश्न
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियों कीजिए:
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हम उस धरती के लड़के हैं, जिस धरती की बातें क्या कहिए; अजी क्या कहिए; हाँ क्या कहिए। यह वह मिट्टी, जिस मिट्टी में खेले थे यहाँ ध्रुव से बच्चे। यह मिट्टी, हुए प्रहलाद जहाँ, जो अपनी लगन के थे सच्चे। शेरों के जबड़े खुलवाकर, थे जहाँ भरत दतुली गिनते, जयमल-पत्ता अपने आगे, थे नहीं किसी को कुछ गिनते! इस कारण हम तुमसे बढ़कर, हम सबके आगे चुप रहिए। अजी चुप रहिए, हाँ चुप रहिए। हम उस धरती के लड़के हैं..... |
- विशेषताओं के आधार पर पहचानिए: (2)
- किसी को कुछ न गिनने वाला → .............
- अपनी लगन का सच्चा → .............
- इस मिट्टी में खेलने वाला → .............
- शेरों के जबड़े खुलवाकर दाँत गिनने वाला → .............
- ‘सफलता के लिए लगन की आवश्यकता’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
आकलन
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उत्तर
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- किसी को कुछ न गिनने वाला → जयमल-पत्ता
- अपनी लगन का सच्चा → प्रहलाद
- इस मिट्टी में खेलने वाला → ध्रुव
- शेरों के जबड़े खुलवाकर दाँत गिनने वाला → भरत
- किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम के साथ-साथ अटूट लगन का होना अनिवार्य है। लगन का अर्थ है अपने काम के प्रति पूर्ण समर्पण और निष्ठा। जब हमारे भीतर किसी कार्य को पूरा करने की सच्ची तड़प या लगन होती है, तो मार्ग में आने वाली बड़ी से बड़ी बाधाएँ भी हमें रोक नहीं पातीं। जिस प्रकार पद्यांश में भक्त प्रहलाद ने अपनी लगन के बल पर ईश्वर को पा लिया, उसी प्रकार यदि हम भी अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहें, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। बिना लगन के प्रतिभा भी व्यर्थ हो जाती है, जबकि लगन और निरंतरता एक साधारण व्यक्ति को भी असाधारण ऊँचाइयों तक पहुँचा सकती है।
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
