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प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए:
आत्मपरिचय कविता में कवि एक ओर जग-जीवन का भार लिए घूमने की बात करता है और दूसरी ओर मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ- विपरीत से लगते इन कथनों पर आपका क्या मत है?
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उत्तर
कविता में एक ओर जग-जीवन का भार लिए घूमने की बात करता है इसका आशय मनुष्य की सामजिकता से है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है इसलिए उसे सांसारिक दायित्वों का निर्वाह करना पड़ता है जैसे कवि कर रहे हैं। जीवन में दुख-सुख दोनों ही आते हैं। मनुष्य को अनेक कष्टों का सामना करना पड़ता है परन्तु वह इस जीवन से अलग नहीं हो सकता। दूसरी ओर मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ का आशय अन्य लोगों द्वारा किए गए आलोचना से है। कवि इसे हृदयहीन और स्वार्थी मानते हैं। वह अपनी मस्ती में रहते हैं और जहाँ तक हो सके प्रेम बाँटने की कोशिश करते हैं।
