Advertisements
Advertisements
प्रश्न
निम्नलिखित पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए -
इत्ते ढेर से नोट लगे हैं घर बणाने में। गाँठ में नहीं है पैसा, चले हाथी खरीदने।
Advertisements
उत्तर
सुकिया, मानो को कहता है कि घर बनाना आसान काम नहीं है। इसके लिए बहुत सारे नोटों की आवश्यकता होती है। इस समय हमारे पास इतने पैसे नहीं है। हमारी ऐसी ही स्थिति है कि हाथ में पैसा नहीं है और हाथी खरीदने की इच्छा रखते हैं।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
जसदेव की पिटाई के बाद मज़दूरों का समूचा दिन कैसा बीता?
मानो अभी तक भट्ठे की ज़िंदगी से तालमेल क्यों नहीं बैठा पाई थी?
असगर ठेकेदार के साथ जसदेव को आता देखकर सूबे सिंह क्यों बिफर पड़ा और जसदेव को मारने का क्या कारण था?
जसदेव ने मानो के हाथ का खाना क्यों नहीं खाया ?
लोगों को क्यों लग रहा था कि किसी ने जानबूझ कर मानो की ईंटें गिराकर रौंदा है?
मानो को क्यों लग रहा था कि किसी ने उसकी पक्की ईंटों के मकान को धराशाई कर दिया है?
'चल! ये लोग म्हारा घर ना बणने देंगे।' – सुकिया के इस कथन के आधार पर कहानी की मूल संवेदना स्पष्ट कीजिए।
'खानाबदोश' कहानी में आज के समाज की किन-किन समस्याओं को रेखांकित किया गया है?
इन समस्याओं के प्रति कहानीकार के दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए।
सुकिया ने जिन समस्याओं के कारण गाँव छोड़ा वही समस्या शहर में भट्टे पर उसे झेलनी पड़ी - मूलतः वह समस्या क्या थी ?
'स्किल इंडिया' जैसा कार्यक्रम होता तो क्या तब भी सुकिया और मानो को खानाबदोश जीवन व्यतीत करना पड़ता ?
निम्नलिखित पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए -
अपने देस की सूखी रोटी भी परदेस के पकवानों से अच्छी होती है।
निम्नलिखित पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए -
उसे एक घर चाहिए था - पक्की ईंटों का, जहाँ वह अपनी गृहस्थी और परिवार के सपने देखती थी।
अपने आसपास के क्षेत्र में जाकर ईंटों के भट्ठे को देखिए तथा ईंटें बनाने एवं उन्हें पकाने की प्रकिया का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
भट्ठा-मज़दूरों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार कीजिए।
जाति प्रथा पर एक निबंध लिखिए।
