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प्रश्न
लोगों को क्यों लग रहा था कि किसी ने जानबूझ कर मानो की ईंटें गिराकर रौंदा है?
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उत्तर
मानो और सुकिया से सूबेसिंह बहुत चिढ़ा हुआ था। वह उनको हर तरह परेशान करने पर आमादा था। जब सुबह मानो ने अपनी थापी हुई ईंटों को जाकर देखा तो कच्ची ईंटें टूटी-फूटी पड़ी थीं। ऐसा लग रहा था जैसे ईंटों को किसी ने जानबूझकर गिराया था। लोग कह रहे थे कि रात में कोई आँधी-तूफान नहीं आया और वह किसी जंगली जानवर का भी काम नहीं लग रहा था। अनेक लोग मानते थे कि ईंटें जानबूझकर तोड़ी गई थीं। सब जानते थे कि वह करतूत सूबेसिंह के अलावा और किसी की नहीं थी।
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