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प्रश्न
निम्नलिखित शब्द के युग्म शब्द बताओ और वाक्य में उचित शब्दयुग्म लिखो:
______ - फूल
बाजार से बहुत सारे ______ खरीदकर लाए।
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उत्तर
फल - फूल
बाजार से बहुत सारे फल-फूल खरीदकर लाए।
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निम्न शब्द का लिंग पहचानकर लिखो
आत्मा
पाँच-पाँच सहायक और प्रेरणार्थक क्रियाओं का अपने स्वतंत्र वाक्यों में प्रयोग करो।
पाठ में प्रयुक्त उद्धरण, सुवचन, मुहावरे, कहावतें, आलंकारिक शब्द आदि की सूची बनाकर अपने लेखन प्रयोग हेतु संकलन करो।
रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:
लोग उनकी असफलता पर क्या-क्या टिप्पणी करेंगे।
नीचे दिए गए चिन्ह के सामने उनका नाम लिखिए तथा वाक्य में उचित विरामचिह्न लगाइए
" ........ "
दिए गए अव्यय भेदों के वाक्य पाठ्यपुस्तक से ढूँढ़कर लिखिए:

निम्नलिखित वाक्य को पढ़ो और मोटे अक्षर में छपे शब्द पर ध्यान दो, पढ़कर उद्देश्य-विधेय अलग करके लिखो:
हिलामय देश का गौरव है।
निम्नलिखित वाक्य पढ़ो तथा मोटे और अधोरेखित किये गए शब्दों पर ध्यान दो :
जलाशय चॉंदी की भाँति चमचमा रहा था।
निम्नलिखित वाक्य पढ़ो और मोटे और अधोरेखित किये गए शब्द पर ध्यान दो :
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अर्थ के आधार पर वाक्य पढ़ो, समझो और उचित स्थान पर लिखो :
वाह ! क्या बनावट है ताजमहल की !
सूचना, निर्देश, आदेश, अनुरोध, विनती के वाक्य विरामचिह्न सहित पढ़ो और समझो :
बगीचे के फल-फूल तोड़ना मना है।
निम्नलिखित शब्दों में उपसर्ग लगाकर लिखो।

निम्न विशेषण शब्द का अपने वाक्य में प्रयोग करके उनका प्रकार लिखो।
शब्द के वचन पहचान कर परिवर्तन कीजिए एवं अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए:-
श्रृंखलाएँ
शब्द के लिंग पहचानिए:
अभ्यर्थना = ______
निम्न संवाद को पढ़िए, समझिए तथा कारक रेखांकित करके उनके चिह्नों के नाम लिखिए:-
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जंगल के राजा शेरसिंह टेलीविजन पर समाचार देख रहे थे, कई समाचार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के बारे में थे, वे इसके समाधान के लिए कुछ करना चाहते थे- |
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| शेरसिंह - | जंबो हाथी को बुलाया जाए। |
| सेवक - | जो आज्ञा महाराज। |
| जंबाे - | प्रणाम महाराज, आपने मुझे याद किया। |
| शेरसिंह - | जंगल में सड़क दुर्घटनाएँ बहुत बढ़ गई हैं। लोग नियमों से दूर जा रहे हैं। इससे मैं बहुत दुखी हूँ। |
| जंबो - | चिंता न करें, मैं इस मामले में आपकी सहायता करूँगा। मुझे रिपोर्ट बनाने के लिए समय दें। |
| शेरसिंह - | जंबो ! तुम पूरा समय लो। (कुछ दिनों बाद रिपोर्ट लेकर जंबो पहुँचा।) |
| जंबो - | महाराज, जंगल निवासी ट्रैफिक के नियमों का पालन नहीं करते हैं। |
| शेरसिंह - | ठीक है, हम नागरिकों से ट्रैफिक के नियमों का सख्ती से पालन करवाएँगे। |
| जंबो - | दोपहिया चलाने वालों को हेल्मेट पहनना और कार चलाने वालों को सीट बेल्ट बांधना अनिवार्य कर सकते हैं। |
| शेरसिंह - | विद्यालयों, अस्पतालों और पार्किंगवाले स्थानों के पास गति सीमा को बताने वाले चिह्नों को क्यों न लगा दिया जाए? |
| जंबो - | महाराज, साइकिल चलाने वालों और पैदल चलने वालों के लिए आप एक अलग से रास्ता बनवा सकते हैं। |
| शेरसिंह - | तुम्हारी सलाह के लिए तुम्हें धन्यवाद। |
| क्र. | कारक | कारक चिह्न |
इस निबंध के अंश पढ़कर विदेशी, तत्सम, तद्भव शब्द समझिए। इसी प्रकार के अन्य पाँच-पाँच शब्द ढूँढ़िए।
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कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है। हिंदी में कुछ शब्द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं। शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है। हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है। प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा। तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे। |
पाठ्यपुस्तक के पाठ (सच का सौदा) से बीस विशेष शब्द ढूँढ़कर लिखिए।

निम्नलिखित वाक्यों में से शुद्ध वाक्य का चयन कीजिए:
