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प्रश्न
निम्नलिखित पंक्तियों से प्राप्त जीवनमूल्य लिखिए :
कोई ऐसी शक्ल ______
______ मुझे अक्सर दिखो ।
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उत्तर
हे ईश्वर, मैं चाहता हूँ कि मैं जिसे भी देखू, मुझे उसी में तुम नजर आओ। अर्थात मानव मात्र ईश्वर का अंश है।
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भीड़
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तितली
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आसमान
निम्नलिखित पंक्तियों से प्राप्त जीवनमूल्य लिखिए :
आपको महसूस ______
______ भीतर दिखो ।
कृति पूर्ण कीजिए:


निम्नलिखित पठित पद्यांश दी गई पढ़कर सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
| एक जुगनू ने कहा मैं भी तुम्हारे साथ हूँ, वक्त की इस धुंध में तुम रोशनी बनकर दिखो। एक मर्यादा बनी है हम सभी के वास्ते, गर तुम्हें बनना है मोती सीप के अंदर दिखो। डर जाए फूल बनने से कोई नाजुक कली, तुम ना खिलते फूल पर तितली के टूटे पर दिखो। कोई ऐसी शक्ल तो मुझको दिखे इस भीड़ में, मैं जिसे देखूँ उसी में तुम मुझे अक्सर दिखो। |
1. पद्यांश के आधार पर संबंध जोड़कर उचित वाक्य तैयार कीजिए: (2)
- जुगनू - धुंध
- रोशनी - तितली
मैं
- ______
- ______
2.
i. निम्नलिखित के लिए पद्यांश से शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (1)
- लोगों का समूह - ______
- सीप में बनने वाला रत्न् - ______
ii. पद्यांश में आए 'पर' शब्द के अलग-अलग अर्थ लिखिए: (1)
- ______
- ______
3. अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ २५ से ३० शब्दों में लिखिए: (2)
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
आपसे किसने कहा स्वर्णिम शिखर बनकर दिखो, चल पड़ी तो गर्द बनकर आसमानों पर लिखो, सिर्फ देखने के लिए दिखना कोई दिखना नहीं, जिंदगी की शक्ल जिसमें टूटकर बिखरे नहीं, |
(1) उचित जोड़ियाँ मिलाइए: (2)
| ‘अ’ | ‘आ’ |
| (i) शिखर | गर्द |
| (ii) आसमान | जिंदगी |
| (iii) पत्थर | स्वर्णिम |
| (iv) शक्ल | मील |
| नींव |
(2) उत्तर लिखिए: (2)
(i) मनुष्य को ये बनकर दिखाना है:
- ______
- ______
(ii) कवि दिखने के लिए कहते हैं:
- ______
- ______
(3) प्रथम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए। (2)
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