मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १० वी

जिनके उत्‍तर निम्‍न शब्‍द हों, ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए: आसमान - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

जिनके उत्‍तर निम्‍न शब्‍द हों, ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए:

आसमान

एका वाक्यात उत्तर
Advertisements

उत्तर

किस पर लिखने से ऊँचाइयों को छूने का संकेत मिलता है?

shaalaa.com
गजल
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.08: गजल - स्‍वाध्याय [पृष्ठ ३४]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Lokbharati [English] Standard 10 Maharashtra State Board
पाठ 1.08 गजल
स्‍वाध्याय | Q (३) ४. | पृष्ठ ३४

संबंधित प्रश्‍न

गजल की पंक्‍तियों का तात्‍पर्य :

नींव के अंदर दिखाे - ______


गजल की पंक्‍तियों का तात्‍पर्य :

आईना बनकर दिखो - ______


कृति पूर्ण कीजिए:


जिनके उत्‍तर निम्‍न शब्‍द हों, ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए :

जुगनू


जिनके उत्‍तर निम्‍न शब्‍द हों, ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए :

तितली


निम्‍नलिखित पंक्‍तियों से प्राप्त जीवनमूल्‍य लिखिए :

आपको महसूस ______
______ भीतर दिखो ।


निम्‍नलिखित पंक्‍तियों से प्राप्त जीवनमूल्‍य लिखिए :

कोई ऐसी शक्‍ल ______
______ मुझे अक्‍सर दिखो ।


कृति पूर्ण कीजिए:



प्रस्‍तुत गजल की अपनी पसंदीदा किन्हीं चार पंक्‍तियों का केंद्रीय भाव स्‍पष्‍ट कीजिए।


निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

आपसे किसने कहा स्‍वर्णिम शिखर बनकर दिखो,
शौक दिखने का है तो फिर नींव के अंदर दिखाे।

चल पड़ी तो गर्द बनकर आसमानों पर लिखो,
और अगर बैठो कहीं ताे मील का पत्‍थर दिखाे।

सिर्फ देखने के लिए दिखना कोई दिखना नहीं,
आदमी हो तुम अगर तो आदमी बनकर दिखाे।

जिंदगी की शक्‍ल जिसमें टूटकर बिखरे नहीं,
पत्‍थरों के शहर में वो आईना बनकर दिखो। 

(1) उचित जोड़ियाँ मिलाइए: (2)

‘अ’ ‘आ’
(i) शिखर गर्द
(ii) आसमान जिंदगी
(iii) पत्थर स्वर्णिम
(iv) शक्ल मील
  नींव

(2) उत्तर लिखिए: (2)

(i) मनुष्य को ये बनकर दिखाना है:

  1. ______
  2. ______

(ii) कवि दिखने के लिए कहते हैं:

  1. ______
  2. ______

(3) प्रथम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए। (2)


आखिरी शेर में गुलमोहर की चर्चा हुई है। क्या उसका आशय एक खास तरह के फूलदार वृक्ष से है या उसमें कोई सांकेतिक अर्थ निहित है? समझाकर लिखें।


गज़ल के तीसरे शेर को गौर से पढ़े। यहाँ दुष्यंत का इशारा किस तरह के लोगों की ओर है?


दुष्यंत की इस गज़ल का मिजाज बदलाव के पक्ष में है। इस कथन पर विचार करें।


'यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है'  यह वाक्य मुहावरे की तरह अलग-अलग परिस्थितियों में अर्थ दे सकता है। मसलन, यह ऐसी अदालतों पर लागू होता है, जहाँ इंसाफ़ नहीं मिल पाता। कुछ ऐसी परिस्थितियों की कल्पना करते हुए निम्नांकित अधूरा वाक्य को पूरा करें।

यह ऐसे नाते-रिश्तों पर लागू होता है, ______।


'यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है' यह वाक्य मुहावरे की तरह अलग-अलग परिस्थितियों में अर्थ दे सकता है। मसलन, यह ऐसी अदालतों पर लागू होता है, जहाँ इंसाफ़ नहीं मिल पाता। कुछ ऐसी परिस्थितियों की कल्पना करते हुए निम्नांकित अधूरा वाक्य को पूरा करें।

यह ऐसी पुलिस व्यवस्था पर लागू होता है, ______।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×