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मूक सिनेमा में संवाद नहीं होते, उसमें दैहिक अभिनय की प्रधानता होती है। पर, जब सिनेमा बोलने लगा उसमें अनेक परिवर्तन हुए। उन परिवर्तनों को अभिनेता, दर्शक और कुछ तकनीकी दृष्टि से पाठ का आधार लेकर खोजें

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प्रश्न

मूक सिनेमा में संवाद नहीं होते, उसमें दैहिक अभिनय की प्रधानता होती है। पर, जब सिनेमा बोलने लगा उसमें अनेक परिवर्तन हुए। उन परिवर्तनों को अभिनेता, दर्शक और कुछ तकनीकी दृष्टि से पाठ का आधार लेकर खोजें, साथ ही अपनी कल्पना का भी सहयोग लें।

टीपा लिहा
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उत्तर

मूक सिनेमा में संवाद न होने के कारण केवल अंगों का प्रयोग किया जाता था। बोलती फिल्म बनने के कारण अभिनेताओं में यह परिवर्तन आया कि उनका पढ़ा लिखा होना ज़रूरी हो गया, क्योंकि अब उन्हें संवाद भी बोलने पड़ते थे।

दर्शकों पर भी अभिनेताओं का प्रभाव पड़ने लगा। नायक-नायिका के लोकप्रिय होने से औरतें अभिनेत्रियों की केश सज्जा तथा उनके कपड़ों की नकल करने लगीं।

तकनीकी दृष्टि से फिल्मों में काफ़ी बदलाव आया, फिल्में अधिक आकर्षक लगने लगी, गीत-संगीत का भी महत्व बढ़ने लगा। धीरे-धीरे आम भाषा का प्रयोग होने लगा।

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गद्य (Prose) (Class 8)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 11: जब सिनेमा ने बोलना सीखा - पाठ से आगे [पृष्ठ ६६]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Vasant Bhag 3 Class 8
पाठ 11 जब सिनेमा ने बोलना सीखा
पाठ से आगे | Q 1 | पृष्ठ ६६

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