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पानी की कहानी में लेखक ने कल्पना और वैज्ञानिक तथ्य का आधार लेकर ओस की बूंद की यात्रा का वर्णन किया हैओस की बूंद अनेक अवस्थाओं में सूर्यमंडल, पृथ्वी, वायु, समुद्र, ज्वालामुखी, बादल, नदी और जल से होते - Hindi (हिंदी)

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प्रश्न

पानी की कहानी में लेखक ने कल्पना और वैज्ञानिक तथ्य का आधार लेकर ओस की बूंद की यात्रा का वर्णन किया हैओस की बूंद अनेक अवस्थाओं में सूर्यमंडल, पृथ्वी, वायु, समुद्र, ज्वालामुखी, बादल, नदी और जल से होते हुए पेड़ के पत्ते तक की यात्रा करती हैइस कहानी की भाँति आप भी लोहे अथवा प्लास्टिक की कहानी लिखने का प्रयास कीजिए।

लेखन कौशल्य
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उत्तर १

लोहे की कहानी

मैं धरती की गहराई में छिपा हुआ एक लौह-अयस्क था। लाखों वर्षों से मैं चट्टानों के बीच शांत पड़ा था। एक दिन जोरदार मशीनों ने मुझे खदान से बाहर निकाला। मैं पहली बार खुले आसमान को देख रहा था। मुझे बड़े ट्रकों में भरकर लोहे की फैक्ट्री ले जाया गया। वहाँ विशाल भट्टियाँ थीं, जिनमें मुझे बहुत ऊँचे तापमान पर पिघलाया गया। धीरे-धीरे मेरे अंदर की अशुद्धियाँ हटाई गईं और मैं चमकदार लोहे के रूप में बदल गया।

इसके बाद मशीनों ने मेरा नया आकार तैयार किया। कभी मुझे कील बनाया गया, कभी रॉड और कभी हथौड़ा। कुछ समय बाद मेरा रूप बदलकर मैं एक मजबूत लोहे की ग्रिल बन गया, जो एक बड़े घर की सुरक्षा कर रही थी। वर्षों तक मैंने बारिश, धूप और तूफान सहकर घर को सुरक्षित रखा। फिर समय के साथ मुझ पर जंग लगने लगी। कमजोर होने पर मुझे हटाकर कबाड़खाने भेज दिया गया।

लेकिन मेरी यात्रा यहीं खत्म नहीं हुई। कबाड़खाने वाली मशीनों ने मुझे फिर पिघलाया और दोबारा शुद्ध किया। इस बार मेरा रूप बदलकर मैं एक पुल का सहायक स्तंभ बन गया। अब मैं लोगों को सुरक्षित नदी पार कराता हूँ। इस तरह मैं धरती से निकलकर, फैक्ट्री, घर, कबाड़ और फिर पुल तक की लंबी यात्रा पूरी करता रहा।

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उत्तर २

प्लास्टिक की कहानी

मैं कच्चे तेल से बनी एक छोटी-सी प्लास्टिक की कण थी। मेरी शुरुआत धरती के भीतर करोड़ों वर्ष पहले बने पेट्रोलियम से हुई। एक दिन मुझे फैक्ट्री में लाया गया, जहाँ मुझे गर्म करके और मशीनों में डालकर पारदर्शी प्लास्टिक की बोतल बना दिया गया। कुछ ही समय में मैं बाजार तक पहुँची और एक व्यक्ति मुझे खरीदकर अपने साथ ले गया। उसने पानी पिया और मुझे कूड़ेदान में फेंक दिया।

कूड़ेदान से हवा मुझे दूर मैदानों तक उड़ाकर ले गई। बारिश आई, और मैं बहते हुए नाली में पहुँची। नाली से नदी और नदी से समुद्र तक मेरी यात्रा चलती गई। समुद्र में मैंने अपने जैसे सैकड़ों प्लास्टिक के टुकड़े देखे। मछलियाँ और पक्षी हमें खाना समझकर परेशान हो जाते। यह देखकर मुझे दुख हुआ कि मैं प्रकृति का हिस्सा नहीं हूँ, फिर भी उसे नुकसान पहुँचा रही हूँ।

एक दिन समुद्र तट पर सफाई करने वाली टीम ने मुझे उठाकर रीसाइक्लिंग केंद्र भेज दिया। वहाँ मशीनों ने मुझे धोया, पिघलाया और नए कणों में बदल दिया। इस बार मुझे एक प्लास्टिक के खूबसूरत गमले के रूप में ढाल दिया गया। अब मैं एक पेड़ की रक्षा कर रहा हूँ और किसी को नुकसान नहीं पहुँचा रहा हूँ। मेरी यात्रा तेल से समुद्र तक और फिर रीसाइक्लिंग के बाद जीवन में नए रूप में लौट आई।

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Notes

Students should refer to the answer according to the question.

गद्य (Prose) (Class 8)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 16: पानी की कहानी - अनुमान और कल्पना [पृष्ठ १०७]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Vasant Part 3 Class 8
पाठ 16 पानी की कहानी
अनुमान और कल्पना | Q 1 | पृष्ठ १०७

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