Advertisements
Advertisements
प्रश्न
मॉं को एक दिन की छुट्टी दी जाए तो क्या होगा ?
Advertisements
उत्तर
माँ प्रत्येक परिवार की सबसे अहम कड़ी और सदस्य है। माँ दिन-भर पूरे घर और परिवार की देखभाल में लगी रहती है। वह साल के ३६५ दिन काम करती है। कभी छुट्टी नहीं लेती। यदि किसी दिन माँ को एक दिन की छुट्टी दी जाए तो पूरे घर की साफ-सफाई नहीं होगी। कौन-सी चीज कहाँ रखी है, किसी को भी पता नहीं चलेगा। सब परेशान हो जाएँगे। कोई भी समय से अपने काम पर नहीं जा पाएगा। हमें समय पर खाना-पानी भी नहीं मिल सकेगा।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
किसी मौलिक मराठी विज्ञापन का हिंदी में अनुवाद करो।
अंतरजाल से डॉ. रामकुमार वर्मा जी से संबंधित अन्य साहित्यिक जानकारियाँ प्राप्त करो।
पूरी वर्णमाला क्रम से पढ़ो:
क्ष श य प त ट च क ए अ ञ ष र फ
थ ठ छ ख ऐ आ ज्ञ स ल ब घ ढ़ ई ॠ
द ड ज ग ओ इ श्र ह व भ ध ढ झ ऑ
ळ म न ण त्र ङ अं उ ड़ अः ऊ अँ औ
यदि सच में हमारे मामा का घर चॉंद पर होता तो...
समाज सेवी महिला की जीवनी पढ़कर प्रेरणादायी अंश चुनाे और बताओ।
अक्षर समूह में से खिलाड़ियों के नाम बताओ और लिखो।
| इ | ह | ना | सा | ल | वा | ने | |
| ध्या | द | चं | न | ||||
| व | शा | ध | जा | बा | खा | ||
| ह | ल्खा | सिं | मि | ||||
| म | री | काॅ | मे | ||||
| नि | मि | सा | र्जा | या | |||
| न | र | स | ल | डु | तें | क | चि |
किसी एक संस्मरणीय घटना का वर्णन करो।
अपने साथ घटित कोई मजेदार घटना बताओ।
आप तरुण वैश्य/तरुणा वैश्य हैं। आप बी. एड कर चुके हैं। आपको विवेक इंटरनेशनल स्कूल, अ ब स नगर में हिंदी अध्यापक/अध्यापिका पद के लिए आवेदन करना है। इसके लिए आप अपना एक संक्षिप्त स्ववृत्त (बायोडाटा) लगभग 80 शब्दों में तैयार कीजिए।
निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:
| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
