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लेखिका अपने भीतर अपने पिता को किन-किन रूपों में पाती है?

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प्रश्न

लेखिका अपने भीतर अपने पिता को किन-किन रूपों में पाती है?

टीपा लिहा
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उत्तर

लेखिका के व्यक्तित्व के विकास में उसके पिता का सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों रूपों में योगदान है। लेखिका आज अपने विश्वास को जो खंडित पाती है, उसकी व्यथा के नीचे उनके शक्की स्वभाव की झलक दिखाई पड़ती है। इसके अलावा उसके पिता जी उसके भीतर कुंठा के रूप में, प्रतिक्रिया के रूप में और कहीं प्रतिच्छाया के रूप में विद्यमान हैं।

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