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प्रश्न
क्या आपको दूसरों के इशारों पर काम करना अच्छा लगता है? इसका तर्कसंगत उत्तर दीजिए।
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उत्तर
कदापि नहीं, हमें दूसरों के इशारों पर पलना बिलकुल पसंद नहीं है। इससे हमारी आज़ादी का हनन होता है, साथ ही प्रत्येक स्वाभिमानी व्यक्तियों के विचारों के विपरीत है। अतः स्वाभिमानी व्यक्ति अपनी शर्तों पर स्वच्छंद जीना पसंद करते हैं। अतः हमें दूसरों के इशारों पर काम करना अच्छा नहीं लगता है।
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कार |
फूल |
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क्यारियाँ |
चिड़ियाँ |
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सड़क |
फल |
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खेत |
तालाब |
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कारखाने |
पेड़ |
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कुर्सी |
कागज़ |
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पत्ता |
टहनी |
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पहली कठपुतली ने स्वयं कहा कि-'ये धागे/क्यों हैं मेरे पीछे-आगे?/इन्हें तोड़ दो;/मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो।'-तो फिर वह चिंतित क्यों हुई कि-'ये कैसी इच्छा/मेरे मन में जगी?' नीचे दिए वाक्यों की सहायता से अपने विचार व्यक्त कीजिए-
•उसे दूसरी कठपुतलियों की ज़िम्मेदारी महसूस होने लगी।
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•वह स्वतंत्रता की इच्छा को साकार करने और स्वतंत्रता को हमेशा बनाए रखने के उपाय सोचने लगी।
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(क) सन् 1857 ______ ______
(ख) सन् 1942 ______ ______
कविता की भाषा में लय या तालमेल बनाने के लिए प्रचलित शब्दों और वाक्यों में बदलाव होता है। जैसे-आगे-पीछे अधिक प्रचलित शब्दों की जोड़ी है, लेकिन कविता में 'पीछे-आगे' का प्रयोग हुआ है। यहाँ 'आगे' का '...बोली ये धागे' से ध्वनि का तालमेल है। इस प्रकार के शब्दों की जोड़ियों में आप भी परिवर्तन कीजिए-दुबला-पतला, इधर-उधर, ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ, गोरा-काला, लाल-पीला आदि।
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