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प्रश्न
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा लिखत –
अद्य तु ______ अपि वृक्षाः न सन्ति।
पर्याय
पर्वतीयस्थलम्
पर्वतीयस्थले
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उत्तर
अद्य तु पर्वतीयस्थले अपि वृक्षाः न सन्ति।
संबंधित प्रश्न
मञ्जूषायाः उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
| (पुत्रः आगच्छति।) | |
| अमितः | मातः! अतीव बुभुक्षा बाधते माम्। किं भोजन सज्जम्? |
| अम्बा | आम् पुत्र! ______ कुरु। |
| अमितः | किं ______? |
| अम्बा | तोरिका। |
| अमितः | अहो बहिर्गन्तव्यम्। विलम्बः भवति। बुभुक्षा नास्ति। |
| अम्बा | (हसन्ती) ‘तोरिका’ इति कथने ______ समाप्ता किम्? |
| अमितः | (हसन्) एवं नास्ति मातः! |
| अम्बा | तहिं ______ कुत्र खादिष्यसि? |
| अमितः | न जानामि। |
| अम्बा | तहिं आगच्छा। उष्णं शाकं ______ च खाद। |
| अमितः | अस्तु, शीघ्रं खादित्वा। गच्छामि। |
| रोटिका, शाकं रोटिकां च, बुभुक्षा, पक्वम्, भोजनम् |
उचितविभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ च पश्यन्ति। (वृक्ष, पुष्प, बहुव.)
उदाहरणानुसारं लिखित –
| शब्द: | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुचनम् |
| जन | द्वितीया | जनम् | जनौ | जनान् |
| पुरूष | ______ | ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं लिखित –
| शब्द: | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुचनम् |
| शाखा | द्वितीया | शाखाम् | शाखे | शाखाः |
| जिव्हा | ______ | ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं लिखित –
| शब्द: | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुचनम् |
| पत्र | द्वितीया | पत्रम् | पत्रे | पत्राणि |
| फल | ______ | ______ | ______ | ______ |
अधोलिखितश्लोकेभ्यः तृतीयाविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
पुत्राश्च विविधैः शीलैंर्नियोज्याः सततं बुधैः।
नीतिज्ञाः शीलसम्पन्ना भवन्ति कुलपूजिताः।
| ______ | ______ | ______ |
अधोलिखितश्लोकेभ्यः तृतीयाविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
दरिद्रता धौरतया विराजते,
कुवस्त्रता शुभ्रतया विराजते।
कदन्नता चोष्णतया विराजते,
कुरूपता शीलतया विराजते।
| ______ | ______ | ______ | ______ |
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
सः जनः______ अन्धः तथापि पराश्रितः न अस्ति।
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ होनः पशुभिः समानः।
घटात् चतुर्थी-विभक्तियुक्तपदानि चित्वा उचितकोष्ठके लिखत –

| एकवचन | द्विवचनम | बहुवचनम |
| ______ | ______ | ______ |
| ______ | ______ | ______ |
| ______ | ______ | ______ |
| ______ | ______ | ______ |
| ______ | ______ | ______ |
| ______ | ||
चतुर्थी-विभक्तियुक्तपदानि स्थूलरेखया चिह्नतानि कुरुत पृथक्तया लिखत च –
शक्तिः परेषां परिपीडनाय।
उदाहरणानुसारं लिखत –
| शब्दः | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| यथा- महिला | पञ्चमी | महिलायाः | महिलाभ्याम् | महिलाभिः |
| कन्या | ______ | ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं लिखत –
| शब्दः | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| यथा- मित्रम् | पञ्चमी | मित्रम् | मित्राभ्याम् | मित्रेभ्यः |
| गात्रम् | ______ | ______ | ______ | ______ |
षष्ठीविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
नरस्याभरणं रूपं रूपस्याभरणं गुण:।
गुणास्याभरणं ज्ञानं ज्ञानस्याभरणं क्षमा।।
| ______ | ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं लिखत –
| नर | ||
| नरस्य | नर्योः | नराणां |
| नदी | ||
| ______ | ______ | ______ |
षष्ठीविभक्तियुक्तपदानां रचनां कुरुत –

| ______ | ______ | ______ |
| ______ | ______ | ______ |
सप्तमीविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
उत्सवे व्यसने चैव
दुर्भिक्षे शत्रुविग्रहे।
राजद्वारे श्मशाने च,
यस्तिष्ठति स बान्धवः।

सप्तमीविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
परोक्षे कार्यहन्तारम्,
प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्।
वर्ययेत् तादृशं मित्रम्,
विषकुम्भं पयोमुखम्॥

