Advertisements
Advertisements
प्रश्न
उदाहरणानुसारं लिखित –
| शब्द: | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुचनम् |
| शाखा | द्वितीया | शाखाम् | शाखे | शाखाः |
| जिव्हा | ______ | ______ | ______ | ______ |
Advertisements
उत्तर
| शब्द: | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुचनम् |
| शाखा | द्वितीया | शाखाम् | शाखे | शाखाः |
| जिव्हा | द्वितीया | जिह्वा | जिह्वे | जिह्वा: |
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
उचितपदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ पठन्ति।
उदाहरणानुसारं सार्थक पदं लिखत –
| वा | रः | न |
उदाहरणानुसारं सार्थक पदं लिखत –
| शा | खा | सु |
उचितविभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत –
ताः पुष्पाणां ______ दृष्ट्वा प्रसीदन्ति (शोभा)
अधोलिखितश्लोकेभ्यः तृतीयाविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
मनसा चिन्तितं कार्य वाचा नैव प्रकाशयेत्।
मन्त्रेण रक्षयेद् गूढ कार्ये चाऽपि नियोजयेत्।।
| ______ | ______ | ______ |
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
पुत्रः ______ सह गच्छति।
| शब्दः | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| निरधन | तृतीया | निर्धनेन | निर्धनभ्याम् | निर्धनैः |
| धनिक | ______ | ______ | ______ | ______ |
तृतीया-बहुवचनशब्दानां रचनां कुरुत –

अधोलिखितशब्दान् उदाहरणानुसारं लिखत –
| पत्त्रं | ||
| पत्राय | पत्रेभ्याम् | पत्रेभ्यः |
| फलम् | ||
| ______ | ______ | ______ |
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा लिखत –
कुक्कुरः ______ इतस्ततः भ्रमति।
चतुर्थी-विभक्तियुक्तपदानि स्थूलरेखया चिह्नतानि कुरुत पृथक्तया लिखत च –
विद्या विवादाय धनं मदाय।
कोष्ठके प्रदत्तशब्दैः सह उचितविभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत।
______ अङ्कुरः प्रभवति। (बीज)
कोष्ठके प्रदत्तशब्दैः सह उचितविभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत।
______ विद्युत् उद्भवति। (जल)
यथोचितं योजयत –
| पिपीलिका | नरात् |
| देव | वृद्धायाः |
| सैनिक | मधुमक्षिकायाः |
| मधुमक्षिका | सैनिकत् |
| वृद्धा | देवात् |
| नर | पिपीलिकायाः |
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
अद्य चिकित्सालयेषु ______ संख्या प्रतिदिनं वर्धते।
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा लिखत –
अद्य बाला: चलभाषस्य ______ रताः भवन्ति।
उदाहरणमनुसृत्य अधोलिखितान् कोष्ठकान् यथायोग्यपदैः पूरयत –
यथा- जन
| जने | जन्योः | जनेषु |
विद्वत्
| ______ | ______ | ______ |
सप्तमीविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
उत्सवे व्यसने चैव
दुर्भिक्षे शत्रुविग्रहे।
राजद्वारे श्मशाने च,
यस्तिष्ठति स बान्धवः।

