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क़लम अपनी साध, और मन की बात बिलकुल ठीक कह एकाध। यह कि तेरी-भर न हो तो कह, और बहते बने सादे ढंग से तो बह। जिस तरह हम बोलते हैं, उस तरह तू लिख, और इसके बाद भी हमसे बड़ा तू दिख। - Hindi (Elective)

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प्रश्न

निम्नलिखित कविता के अंश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

क़लम अपनी साध,
और मन की बात बिलकुल ठीक कह एकाध।
यह कि तेरी-भर न हो तो कह,
और बहते बने सादे ढंग से तो बह।
जिस तरह हम बोलते हैं, उस तरह तू लिख,
और इसके बाद भी हमसे बड़ा तू दिख।
चीज़ ऐसी दे कि जिसका स्वाद सिर चढ़ जाए
बीज ऐसा बो कि जिसकी बेल बन बढ़ जाए।
फल लगें ऐसे कि सुख-रस, सार और समर्थ
प्राण-संचारी कि शोभा-भर न जिनका अर्थ।
टेढ़ मत पैदा करे गति तीर की अपना,
पाप को कर लक्ष्य, कर दे झूठ को सपना।
विंध्य, रेवा, फूल, फल, बरसात या गर्मी,
प्यार प्रिय का, कष्ट-कारा, क्रोध या नरमी,
देश या कि विदेश, मेरा हो कि तेरा हो
हो विशद विस्तार, चाहे एक घेरा हो,
तू जिसे छू दे दिशा दिशा कल्याण हो उसकी, 
तू जिसे गा दे सदा वरदान हो उसकी।

कवि- ‘भवानी प्रसाद मिश्र’

(क) कविता में ‘कलम’ किसका प्रतीक है?   (1)

  1. कवि
  2. हथियार
  3. समाज की आवाज़
  4. कवि के विचार

(ख) ‘जिस तरह हम बोलते हैं, उस तरह तू लिख’ पंक्ति में कवि कया संदेश देना चाहते हैं?   (1)

  1. सरल भाषा में लिखना
  2. सच्चाई को उजागर करना
  3. बोली की भाषा में लिखना
  4. सामान्य जन के भाव लिखना

(ग) किन पंक्तियों में लेखनी को असत्य और अन्याय के विरुद्ध लिखने की बात कह रहे हैं?   (1)

  1. चीज़ ऐसी दे कि जिसका स्वाद सिर चढ़ जाए
  2. पाप को कर लक्ष्य कर दे झूठ को सपना।
  3. टेढ़ मत पैदा करे गति तीर की अपना
  4. प्राण-संचारी कि शोभा-भर न जिनका अर्थ।

(घ) कविता मैं प्रकृति और मानवीय भावनाआँ का समन्वय कैसे किया गया है?   (1)

(ङ) कविता में कलम से किन बीजों को बोने और चढ़ने की बात कही है?   (2)

(च) कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहते हैं?   (2)

आकलन
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उत्तर

(क) कवि के विचार

(ख) सरल भाषा में लिखना

(ग) पाप को कर लक्ष्य कर दे झूठ को सपना।

(घ) भवानी प्रसाद मिश्र ने प्रकृति और मानवीय भावनाओँ को एक साथ पिरोया है। कलम को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम बनाया गया है, और कहा गया है कि वह जो भी लिखे, वह सच्चा और सार्थक हो। कविता में प्रकृति के विभिन्न तत्वों (विंध्य, रेवा, फूल, फल, बरसात, गर्मी) और मानवीय भावनाओं (प्यार, कष्ट, क्रोध, नरमी) को एक साथ लाकर जीवन की समग्रता को दर्शाया गया है।

(ङ) कवि सृजनात्मकता का महत्व बता रहे हैं। यहाँ बीज से तात्पर्य विचारों से है। विचार इतने गहन और सार्थक हों कि वे व्यापक रूप से फैलें और समाज में बदलाव लाएँ।

(च) मनोभावों को स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्ति प्रदान करना एवं समाज में आवश्यक परिवर्तन लाना।

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