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प्रश्न
कभी-कभी पोशाकें मनुष्य के लिए बाधक सिद्ध होती हैं। ऐसी पोशाकों की तुलना किससे की है और क्यों ?
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उत्तर
मनुष्य जब अच्छी पोशाक पहनकर कहीं आ जा रहा होता है, उसी समय जब वह निम्न श्रेणी के समझे जाने वालों को दुखी देखता है तो वह उसके दुख से द्रवित होकर उसके दुख के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट करना चाहता है परंतु वह अपनी अच्छी पोशाक के कारण चाहकर भी उसके पास जाकर ऐसा नहीं कर पाता है। लेखक ने ऐसी पोशाकों की तुलना । हवा में लहराती उन कटी पतंगों से की है जो हवा के झोकों के कारण सीधी जमीन पर नहीं गिर पाती हैं। इसी तरह पोशाकें भी मनुष्य को अपनी स्थिति से नीचे जाने से रोकती हैं।
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( ं) यह चिह्न है अनुस्वार का और ( ँ) यह चिह्न है अनुनासिक का। इन्हें क्रमशः बिंदु और चंद्र-बिंदु भी कहते हैं। दोनों के प्रयोग और उच्चारण में अंतर है। अनुस्वार को प्रयोग व्यंजन के साथ होता है अनुनासिक का स्वर के साथ।
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