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प्रश्न
‘जॉर्ज पंचम की नाक’ पाठ के आधार पर बताइए कि रानी एलिजाबेथ द्वितीय के भारत आगमन से पूर्व अधिकारियों को क्या चिंता हुई। देश की नाक बचाने के लिए कौन-सी जी-तोड़ कोशिशें की गईं?
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उत्तर
‘जॉर्ज पंचम की नाक’ पाठ में रानी एलिजाबेथ के भारत आने पर संपूर्ण सरकारी तंत्र अपने सभी काम-काज छोड़कर उनकी तैयारी और स्वागत में लग जाता हैं। जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिंता और लापरवाही पाठ में दृष्टिगत होती है वह सरकारी तंत्र की अयोग्यता, अदूरदर्शिता, चाटुकारिता व मूर्खता को दर्शाती है। उससे उनकी गुलाम मानसिकता का बोध होता है। इससे पता चलता है कि वे आजाद होकर भी अंग्रेजों के गुलाम हैं। उन्हें अपने उस अतिथि की नाक बहुत मूल्यवान प्रतीत होती है, जिसने भारत को गुलाम बनाया और अपमानित किया। वे नहीं चाहते थे कि वे जार्ज पंचम जैसे लोगों के कारनामों को उजागर करके अपनी नाराज़गी प्रकट करें। सरकारी अधिकारी उसकी नाक बचाने में लगे रहे, लाखों करोड़ों रूपये बर्बाद कर अंत में किसी जीवित व्यक्ति की नाक काटकर जार्ज पंचम की नाक पर बिठा दी गई।
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