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इष्टे देषो ......... चाश्नीयात्‌ इत्यस्य गद्यांशस्य आयं हिन्दी भाषया स्पष्ट कुरूत।

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प्रश्न

इष्टे देषो ......... चाश्नीयात्‌ इत्यस्य गद्यांशस्य आयं हिन्दी भाषया स्पष्ट कुरूत।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

प्रसंग
यह कथन कक्षा 11 की संस्कृत पुस्तक शाश्वती से लिया गया है | यह पाठ चरक सहिता पर आधारित है चरक चिकित्सा विषय के पिता माने जाते है उन्होंने चिकित्सा विज्ञान की प्रथम पुस्तक चरक संहिता लिखा है | यह पाठ आहार से सम्बन्धित है इस पाठ में कहा गया है की आहार कैसा होना चाहिए एवं किस स्थान पर करना चाहिए किस प्रकार करना चाहिए इस गद्यांश में कहा गया है की भोजन की उचित स्थान पर ही करना चाहिए।
 
व्याख्याः
आहार सम्बन्धित पाठ में आहार कैसे करे की स्वास्थ्य रह जा सके एवं शरीर में जो तीन दोष है उसका अनुपात किस प्रकार ठीक रखना चाहिए | चरक ने कहा है की मनुष्य उष्म भोजन करना चाहिए जिसे शरिर के कफ का उचित अनुपात हो और स्निग्ध भोजन से शरीर का विकास हो इस लिए उष्म एवं स्निग्ध दोनों प्रकार के भोजन आवश्यक है वाही अधिक जल्दी जल्दी भोजन नहीं करना चाहिए ऐसा करने से भोजन उचित स्थान पर नहीं जाता है जिसे शारीर में अनिक प्रकार के दोष होने लगते है और न ही अधिक धीरे खाना चाहिए मानसिक शांति भी भोजन से ही होता है अधिक देर से खाने पर तृप्ति नहीं मिलती जिसे व्यक्ति का मन अच्छा नहीं रहता है इस लिए भोजन को समय से खाना चाहिए | सही स्थान पर ही भोजन करना चाहिए जिसे पाचन शक्ति ठीक रहे और मनुष्य आवश्यकता अनुसार खा सके | और हँसते बोलते समय समय भोजन नहीं करना चाहिए उचित मात्र में ही भोजन ग्रहण करने से पाचन शक्ति मजबूत रहती है |
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आहारविचारः
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 6: आहारविचार: - अभ्यासः [पृष्ठ ३५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Sanskrit - Shashwati Class 11
पाठ 6 आहारविचार:
अभ्यासः | Q 8 | पृष्ठ ३५

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कथं भुञ्जानस्य उत्स्नेहनस्य समाप्तिः न नियता?


जल्पतः हसतः अन्यमनसः वा भुञ्जानस्य के दोषाः भवन्ति?


बहु भुक्तं आहारजातम्‌  _________


अजल्पन्‌ अहसन्‌  - ______


उष्णं हि भुज्यमानं ______


अतिद्रतं हि न ______


उष्णं भोजनं वातम्‌ ______


अधोलिखितपदानां वाक्येषु प्रयोगं कुरूत।

उष्णम्‌ 


अधोलिखितपदानां वाक्येषु प्रयोगं कुरूत।

तैलादियुक्तं |


अधोलिखितपदानां वाक्येषु प्रयोगं कुरूत।

विवर्धयति


अधोलिखितपदानां वाक्येषु प्रयोगं कुरूत।

अतिद्रतं |


अधोलिखितप्रकृतिप्रत्ययविभागं योजयत।

अश्‌ शतृ पुं.प्रथमा एकवचनम्‌ = ______


अधोलिखितप्रकृतिप्रत्ययविभागं योजयत।

उप + सृज्‌ कर्मवाच्य, लट्, प्र. पु. एकवचनम्‌ = ______ 


अधोलिखितप्रकृतिप्रत्ययविभागं योजयत।

इष्‌ + क्त पु. सप्तमी एकवचनम्‌ =______ 


अधोलिखितप्रकृतिप्रत्ययविभागं योजयत।

न हसन्‌ इति = ______ 


अधोलिखितप्रकृतिप्रत्ययविभागं योजयत।

अभि + नि + वृत्‌ + णिच्‌, लट्लकार, प्र. पु. एकवचनम्‌ = ______


अधोलिखतानां पदानां सन्धिच्छेदं कुरुत।

जीणेऽश्नीयात्‌ ।


अधोलिखतानां पदानां सन्धिच्छेदं कुरुत।

चोष्माणं।


अधोलिखतानां पदानां सन्धिच्छेदं कुरुत।

प्रकोपयत्याशु।


अधोलिखितेषु पदेषु विभक्तिं वचनं च दर्शयत।

मुखेषु।


अधोलिखितेषु पदेषु विभक्तिं वचनं च दर्शयत।

वृद्धिम्‌|


अधोलिखितेषु पदेषु विभक्तिं वचनं च दर्शयत।

अतिविलम्बितम्‌ - ______।


अधोलिखितेषु पदेषु विभक्तिं वचनं च दर्शयत।

जीर्णे - ______। 


अधोलिखितेषु पदेषु विभक्तिं वचनं च दर्शयत।

अतिद्रुतम्‌ -  ______। 


अधोलिखतानां पदानां सन्धिच्छेदं कुरुत।

दोषेष्वग्नो।


अधोलिखितेषु पदेषु विभक्तिं वचनं च दर्शयत।

अभ्यवहृतम् ।


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