Advertisements
Advertisements
प्रश्न
गौरव जानी ने ऐसा क्यों कहा - ‘इतनी उँचाई पर साँस लेने में भी मुश्किल हो रही थी’?
Advertisements
उत्तर
ज्यादा ऊँचाई पर हवा पतली हो जाती है जिसके कारण ऑक्सीजन का स्तर भी कम जाता है। इसलिये वहाँ ऑक्सीजन कम होने के कारण साँस लेने में कठिनाई होती है। इसलिए गौरव जानी ने “इतनी ऊँचाई पर साँस लेने में भी मुश्किल हो रही थी” ऐसा कहा।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
नक्शे में देखकर बताओ कि मुंबई से कश्मीर जाने के रास्ते में कौन-कौन से राज्य आएँगे?
मान लो, तुम्हें अकेले पहाड़ पर दो दिन तक एक टेंट में रहना है और तुम अपने साथ केवल दस चीज़ें ले जा सकते हो। उन दस चीज़ों की सूची बनाओ, जो तुम ले जाना चाहोगे।
ताशी के इलाके के लोग सर्दियों में नीचे की मंज़िल पर रहते हैं। वे ऐसा क्यों करते होंगे?
तुम कभी पहाड़ी इलाके में गए हो? कहाँ?
वह कितनी उँचाई पर था? क्या वहाँ साँस लेने में तुम्हें भी परेशानी आई?
तुम ज़्यादा-से-ज़्यादा कितनी उँचाई तक गए हो?
चांगपा लोगों की ज़िंदगी पूरी तरह से इन जानवरों से जुड़ी है। क्या कोई जानवर तुम्हारी ज़िंदगी का हिस्सा हैं? जैसे - तुम्हारा कोई पालतू जानवर या खेती में इस्तेमाल किए गए जानवर, इत्यादि।
तुमने पढ़ा कि चांगथांग इलाके में तापमान 0°C से काफ़ी कम हो जाता है। टी.वी. या अखबार में देखकर बताओ कि और कौन-से शहर हैं जिनका तापमान 0°C से भी कम हो जाता है। वे शहर भारत के हो सकते हैं या किसी और देश के भी। किन महीनों में तुम्हें ऐसे तापमान की खबरें देखने को मिलेंगी?
तुम्हारे घर में क्या कोई खास बात है? जैसे - ज़्यादा बारिश होती है तो ढलवाँ छत या बड़ा बरामदा, जहाँ गर्मियों में सोते हो और धूप में कुछ सुखाते हो।
तुमने जम्मू-कश्मीर के तरह-तरह के बसेरों के बारे में पढ़ा - कुछ ऊँचे पहाड़ पर, कुछ पानी में, कुछ जिनमें लकड़ी और पत्थर पर सुंदर डिज़ाइन हैं, कुछ जिन्हें बाँधकर किसी और जगह भी ले जाया जा सकता है।
यह घर तुम्हारे घर से कैसे अलग हैं?
