Advertisements
Advertisements
प्रश्न
गौरव जानी ने ऐसा क्यों कहा - ‘इतनी उँचाई पर साँस लेने में भी मुश्किल हो रही थी’?
Advertisements
उत्तर
ज्यादा ऊँचाई पर हवा पतली हो जाती है जिसके कारण ऑक्सीजन का स्तर भी कम जाता है। इसलिये वहाँ ऑक्सीजन कम होने के कारण साँस लेने में कठिनाई होती है। इसलिए गौरव जानी ने “इतनी ऊँचाई पर साँस लेने में भी मुश्किल हो रही थी” ऐसा कहा।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
नक्शे में देखकर बताओ कि मुंबई से कश्मीर जाने के रास्ते में कौन-कौन से राज्य आएँगे?
तुमने किस-किस तरह के घर देखे हैं? उनके बारे में बताओ। चित्र भी बनाओ।
तुम्हारे घर की छत कैसी है? तुम्हारे यहाँ छत किन-किन कामों के लिए इस्तेमाल होती है?
चांगपा लोगों की जिंदगी पूरी तरह से इन जानवरों से जुड़ी है। क्या कोई जानवर तुम्हारी जिंदगी का हिस्सा हैं? जैसे-तुम्हारा कोई पालतू जानवर या खेती में इस्तेमाल किए गए जानवर, इत्यादि।
चांगपा लोगों की ज़िंदगी पूरी तरह से इन जानवरों से जुड़ी है। क्या कोई जानवर तुम्हारी ज़िंदगी का हिस्सा हैं? जैसे - तुम्हारा कोई पालतू जानवर या खेती में इस्तेमाल किए गए जानवर, इत्यादि।
ऐसे पाँच उदाहरण सोचो और लिखो कि जानवर तुम्हारी जिंदगी से कैसे जुड़े हैं।
क्या भेड़-बकरियों को अपने शरीर के बाल की ज़रूरत नहीं होती, चर्चा करो।
क्या तुम्हारे इलाके में भी अलग-अलग तरह के घर हैं? अगर हाँ, तो इसके कारण सोचो।
अंदाज़ा लगाओ कि बकरवाल और चांगपा लोगों की जिंदगी में कौन-सी बातें मिलती-जुलती हो सकती हैं? और क्या फ़र्क है?
तुमने जम्मू-कश्मीर के तरह-तरह के बसेरों के बारे में पढ़ा - कुछ ऊँचे पहाड़ पर, कुछ पानी में, कुछ जिनमें लकड़ी और पत्थर पर सुंदर डिज़ाइन हैं, कुछ जिन्हें बाँधकर किसी और जगह भी ले जाया जा सकता है। बताओ, यह बसेरे वहाँ के लोगों की ज़रूरत के हिसाब से कैसे बने हैं?
