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प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश के सप्रसंग व्याख्या 100 शब्दों में कीजिए।
| एक मिल मालिक के दिमाग में अजीब-अजीब खयाल आया करते थे जैसे सारा संसार मिल हो जाएगा, सारे लोग मज़दूर और वह उनका मालिक या मिल में और चीजों की तरह आदमी भी बनने लगेंगे, तब मजदूरी भी नहीं देनी पड़ेगी, वगैरा-वगैरा। एक दिन उसके दिमाग में खयाल आया कि अगर मज़दूरों के चार हाथ हों तो काम कितनी तेज़ी से हो और मुनाफ़ा कितना ज़्यादा। लेकिन यह काम करेगा कौन ? उसने सोचा, वैज्ञानिक करेंगे, ये हैं किस मर्ज़ की दवा। उसने यह काम करने के लिए बड़े वैज्ञानिकों को मोटी तनख्वाहों पर नौकर रखा और वे नौकर हो गए। कई साल तक शोध और प्रयोग करने के बाद वैज्ञानिकों ने कहा कि ऐसा असंभव है कि आदमी के चार हाथ हो जाएँ। |
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उत्तर
संदर्भ: यह गद्यांश पाठ “चार हाथों वाला आदमी” से लिया गया है, जिसके लेखक सुभाष चंद्र कुशवाहा हैं। इसमें वैज्ञानिक प्रगति और मानव लोभ पर व्यंग्य किया गया है।
प्रसंग: इस अंश में मिल मालिक की महत्वाकांक्षा और अव्यावहारिक वैज्ञानिक प्रयोगों के परिणाम को दिखाया गया है।
व्याख्या: मिल मालिक सोचता है कि यदि मजदूरों के चार हाथ हों, तो वे अधिक तेज़ी से काम करेंगे और उसका लाभ बढ़ेगा। इस लालच में वह वैज्ञानिक को आदेश देता है कि ऐसा मनुष्य तैयार करे। वैज्ञानिक वर्षों तक शोध करता है, पर अंत में कहता है कि मनुष्य के चार हाथ होना असंभव है। इस प्रसंग से स्पष्ट होता है कि विज्ञान की भी सीमाएँ होती हैं और मनुष्य का लोभ उसे अव्यावहारिक इच्छाओं तक पहुँचा देता है।
विशेष: गद्यांश में व्यंग्य, हास्य और वैज्ञानिक यथार्थवाद का प्रभावी चित्रण है।
Notes
- संदर्भ: 1 अंक (पाठ और लेखक का नाम)
- प्रसंग: 1 अंक (पूर्वापर संबंध)
- व्याख्या: 3 अंक
- विशेष: 1 अंक
