Advertisements
Advertisements
प्रश्न
बीज को शक था कि जो हसमुख के साथ हुआ वह तरक्की नहीं है। तुम्हें क्या लगता है?
Advertisements
उत्तर
मैं समझता हूँ कि बीज का शक सही था। खेती के नए तरीकों के द्वारा खेतों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों का शोषण होता है, जिसके कारण खेत अपनी उर्बरा शक्ति खोने लगता हैं, तथा धीरे-धीरे बंजर हो जाया करता है। भू-गर्भीय जल का सिंचाई आदिकार्यों के लिए अत्यधिक दोहन से यह जमीन में काफी नीचे चला जाता है तथा भविष्य के लिए बहुत कम जल बच जाता है। एक मशीन आदमी से ज्यादा काम कर सकता है परन्तु इससे कई लोग बेरोजगार भी हो जाते हैं। अतः एक नजर में तो यह तरक्की लगती है परन्तु यह वास्तविक तरक्की नहीं है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
क्या तुम्हारे घर में रोटियाँ बनती हैं? किस अनाज से?
क्या तुमने कभी ज्वार या बाजरे की रोटी खाई है? तुम्हें कैसी लगी?
बाजरे के बीज ने दामजीभाई की खेती और हसमुख की खेती (जैसे सिंचाई, ज़मीन जोतना, इत्यादि) में क्या-क्या अंतर देखे?
हसमुख कहता-खेती के मुनाफ़े से हम और तरक्की कर सकते हैं। तुम ‘तरक्की’ से क्या समझते हो?
तुम अपने गाँव या इलाके में क्या-क्या तरक्की देखना चाहोगे?
क्या तुम्हारे आस-पास कुछ ऐसे बदलाव हुए हैं, जिन्हें ‘तरक्की’ मानने में कुछ दिक्कतें भी हैं? क्या?
तुम्हारे मन में खेती से जुड़े क्या-क्या सवाल उठते हैं? सब मिलकर कुछ सवाल बनाओ और किसी किसान से पूछो। जैसे – किसान एक साल में कितनी तरह की फ़सल उगाते हैं? किस फ़सल को कितने पानी की जरूरत होती है?
अपने आस-पास किसी खेत या बाड़ी पर जाओ। वहाँ लोगों से बात करो और आस-पास देखो। एक रिपोर्ट तैयार करो।
हमारे खाने में कई बदलाव आए हैं। ऐसा कैसे कह सकते हैं? बाजरे के बीज की कहानी और बड़ों से मिली जानकारी के आधार पर लिखो।
अगर सभी किसान एक ही तरह के बीज बोएँ, एक ही तरह की फ़सल उगाएँ, तो क्या होगा?
