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महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (हिंदी माध्यम) इयत्ता ९ वी

भावार्थ लिखिए:- ॠतु बसंत का सुप्रभात था मंद-मंद था अनिल बह रहा बालारुण की मृदु किरणें थीं अगल-बगल स्‍वर्णाभ शिखर थे एक-दूसरे से विरहित हो अलग-अलग रहकर ही जिनको - Hindi [हिंदी]

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प्रश्न

भावार्थ लिखिए:-

ॠतु बसंत का सुप्रभात था
मंद-मंद था अनिल बह रहा
बालारुण की मृदु किरणें थीं
अगल-बगल स्‍वर्णाभ शिखर थे
एक-दूसरे से विरहित हो
अलग-अलग रहकर ही जिनको
सारी रात बितानी होगी,
थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

कवी कहते हैं बसंत ऋतु की सुबह धीमी धीमी हवा बह रही है। उगते सूरज की प्रथम मृदु किरणें जो सूर्योदय की प्रथम लाली होती है वह इस शिखर पर पडते ही स्वर्ण कलश की अनुभूति करा रही है। यहाँ चकवा-चकवी के प्रेम रूपी विलाप को पानी के हरी-हरी सतहों पर छिड़ते देखा है। जो चकवा-चकवी रात को बिछड़ जाते हैं। 

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बादल को घिरते देखा है
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 2.09: बादल को घिरते देखा है - स्वाध्याय [पृष्ठ ९६]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Kumarbharati [Hindi] Standard 9 Maharashtra State Board
पाठ 2.09 बादल को घिरते देखा है
स्वाध्याय | Q (२) | पृष्ठ ९६
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