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प्रश्न
‘कस्तूरी मृग’ विषय पर टिप्पणी तैयार कीजिए।
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उत्तर
कस्तूरी मृग देखने में हिरण जैसे दिखते हैं और लोक-मान्यता में इन्हें हिरण ही समझा जाता है, लेकिन जीववैज्ञानिक दृष्टि से यह हिरणों के वंश का भाग नहीं हैं। कस्तूरी मृगों में असली हिरणों की भाँति सींग नहीं होते और इनमें कस्तूरी ग्रंथी होती है, जो हिरणों में नहीं होती। कस्तूरी मृग प्राय: हिमालय पर्वत की ऊँचाइयों पर तिब्बत, नेपाल, हिन्दचीन और साइबेरिया, कोरिया, कांसू इत्यादि के पहाड़ी स्थलों में पाया जाता है। उनकी नाभि में कस्तूरी होती है। जब कस्तूरी तैयार हो जाती है, तो कस्तूरी मृग उसकी सुगंध से उन्मादित होकर उसे ढूँढने के लिए जंगल-जंगल, पहाड़-पहाड़ ढूँढता फिरता है। कस्तूरी मृग छोटा और शर्मीला जानवर होता है। कस्तूरी अपने खोज के समय से कई इत्रों में एक महत्वपूर्ण घटक बनी रही है, जिसका उपयोग इत्रों को लम्बे समय तक तीव्र बनाये रखने के लिए एक बंधक के रूप में किया जाता है। कस्तूरी मृग का वजन लगभग १३ किलो तक होता है। इस का रंग भूरा और उस पर काले-पीले धब्बे होते हैं। एक मृग में लगभग ३० से ४५ ग्राम तक कस्तूरी पाई जाती है।
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