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‘अट नहीं रही है’ कविता के आधार पर फागुन में उमड़े प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

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प्रश्न

‘अट नहीं रही है’ कविता के आधार पर फागुन में उमड़े प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

सविस्तर उत्तर
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उत्तर

फागुन का महीना आते ही प्रकृति का सौंदर्य जैसे उमड़ पड़ता है। हवा में मंद-सुगंध बहती है, डालियाँ और लताएँ रंग-बिरंगे फूलों से सज जाती हैं। पेड़ों की टहनियाँ पत्तों से नहीं, बल्कि फूलों की बहार से भर जाती हैं। खेतों में फसलें पकने को तैयार होती हैं और सरसों के पीले फूलों की चादर धरती पर बिछ जाती है।

कविता के अनुसार, यह सौंदर्य इतना अधिक होता है कि कहीं भी "अट" नहीं पाता न दृष्टि में, न मन में और न ही तन में। लोग जिस ओर भी देखते हैं, वहाँ कोई न कोई रंग, रूप या सुगंध उन्हें आकर्षित करती है। इस ऋतु में हर प्राणी के मन में उल्लास और आनंद भर जाता है।

इस प्रकार, फागुन का महीना प्राकृतिक सौंदर्य, प्रेम और रंगों की वर्षा लेकर आता है, जो मन और वातावरण दोनों को रोमांचित कर देती है।

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अट नहीं रही है
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पाठ 5: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' - उत्साह और अट नहीं रही है - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Kshitij Bhag 2 [English] Class 10
पाठ 5 सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' - उत्साह और अट नहीं रही है
अतिरिक्त प्रश्न | Q 9

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