मराठी

अर्धचालकों की चालकता ताप बढ़ाने के साथ-साथ क्यों बढ़ती जाती है?

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

अर्धचालकों की चालकता ताप बढ़ाने के साथ-साथ क्यों बढ़ती जाती है?

एका वाक्यात उत्तर
Advertisements

उत्तर

अर्धचालकों में चालकता बैंड और संयोजकता बैंड के बीच में अंतराल कम होता है (चित्र), अतः ताप बढ़ने पर इलेक्ट्रॉन, संयोजकता बैंड से चालन बैंड में जा सकते हैं इसीलिए ताप बढ़ाने से अर्धचालकों की चालकता बढ़ जाती है।


अर्धचालक

shaalaa.com
विघुतीय गुण
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1: ठोस अवस्था - अभ्यास [पृष्ठ ११]

APPEARS IN

एनसीईआरटी एक्झांप्लर Rasayan Vigyaan [Hindi] Class 12
पाठ 1 ठोस अवस्था
अभ्यास | Q III. 60. | पृष्ठ ११

संबंधित प्रश्‍न

निम्नलिखित को p-प्रकार या n-प्रकार के अर्धचालकों में वर्गीकृत कीजिए –

ln से डोपित Ge


निम्नलिखित को p-प्रकार या n-प्रकार के अर्धचालकों में वर्गीकृत कीजिए –

Si से डोपित B


बैण्ड सिद्धान्त के आधार पर चालक एवं रोधी में क्या अन्तर होता है?


बैण्ड सिद्धान्त के आधार पर चालक एवं अर्धचालक में क्या अन्तर होता है?


निम्नलिखित में से कौन-सा ठोस विद्युत् का चालक नहीं है?

  1. Mg (s)
  2. TiO (s)
  3. I2 (s)
  4. H2O (s)

p -प्रकार के अर्धचालक द्वारा उपार्जत आवेश के बारे में निम्नलिखित में से क्या सही है?


अपमिश्रण से किस प्रकार का द्रोष उत्पन्न होता है?


विद्युत् क्षेत्र के प्रभाव में, p -प्रकार के अर्धचालक के लिए, इलेक्ट्रॉनों तथा छिद्रों के गमन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं?

  1. इलेक्ट्रॉन, इलेक्ट्रॉन छिद्र में से होकर धनावेशित प्लेट की ओर गमन करता है।
  2. इलेक्टॉन छिद्र का गमन ऋणावेशित प्लेट की ओर प्रतीत होता है।
  3. इलेक्ट्रॉन तथा छिद्र तथा दोनों धनावेशित प्लेट की दिशा में गमन करते प्रतीत होते हैं।
  4. इलेक्ट्रॉनों के गमन तथा छिद्रों के गमन में कोई संबंध नहीं होता।

अभिकथन - अर्धचालक, 10-6 से 104 ohm-1 m-1 मध्यवर्ती परास की चालकता युक्त ठोस होते हैं।

तर्क - अर्धचालकों की मध्यवर्ती चालकता आंशिक रूप से भरे संयोजकता बैंड के कारण होती है।


डोपिंग से अर्धचालकों की चालकता क्यों बढ़ जाती है?


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×