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ऐसी बाँणी बोलिये’ के माध्यम से कबीर कैसी वाणी बोलने की सीख दे रहे हैं और क्यों?

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प्रश्न

ऐसी बाँणी बोलिये’ के माध्यम से कबीर कैसी वाणी बोलने की सीख दे रहे हैं और क्यों?

टीपा लिहा
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उत्तर

‘ऐसी बाँणी बोलिये’ के माध्यम से कबीर मनुष्य को अपने मन का अहंकार या घमंड छोड़कर मधुर वाणी में विनम्रता भरी वाणी बोलने की सीख दे रहे हैं। इसका कारण यह है कि अपने मन का अहंकार त्यागने से हमारे शरीर को शांति और शीतलता की अनुभूति होगी तथा मधुर वाणी सुनने वालों को सुखानुभूति होती है।

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साखी
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पाठ 1.1: साखी - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
पाठ 1.1 साखी
अतिरिक्त प्रश्न | Q 1

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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
कबीर की उद्धृत साखियों की भाषा की विशेषता स्पष्ट कीजिए।


भाव स्पष्ट कीजिए

बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।


भाव स्पष्ट कीजिए

कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माँहि।


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कस्तूरी के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।


मीठी वाणी/बोली संबंधी व ईश्वर प्रेम संबंधी दोहों का संकलन कर चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।


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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए:

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  1. हमारा शरीर शीतल होता है।
  2. बोली में अहं का भाव आता है।
  3. हमारा काम सरलतापूर्वक हो जाता है।
  4. सुनने वाले को सुखानुभूति होती है।

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