मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (हिंदी माध्यम) इयत्ता ९ वी

‘आज इस विजय में मेरी सबसे बड़ी पराजय हुई है’ महाराणा के इस कथन पर अपने विचार लिखिए।

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प्रश्न

‘आज इस विजय में मेरी सबसे बड़ी पराजय हुई है’ महाराणा के इस कथन पर अपने विचार लिखिए।

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

महाराणा ने अपने सेनापति अभय सिंह को बूँदी भेजा था, ताकि वे राव हेमू को मेवाड़ की अधीनता स्वीकार करने के लिए राजी कर सके। महाराणा राजपूत राजाओं को मेवाड़ के झंडे के नीचे एकत्र करना चाहते थे ताकि समय आने पर विदेशी शक्तियों का मुकाबला कर सकें। राव हेमू का प्रस्ताव था कि वे मेवाड़ की अधीनता नहीं स्वीकार करेंगे। हाँ, प्रेम का अनुशासन मानने के लिए हाड़ा हमेशा तैयार हैं। महाराणा को राव हेमू की यह प्रतिक्रिया अच्छी नहीं लगी और उन्होंने बिना सोच-विचारे एक अविवेकपूर्ण प्रतिज्ञा की कि जब तक वे ससैन्य बूँदी के दुर्ग में प्रवेश नहीं करेंगे, तब तक अन्न-जल नहीं ग्रहण करेंगे। चारणी के सुझाव पर राजा ने बूँदी का एक नकली दुर्ग बनवाया और निश्चय किया कि वे उसमें प्रवेश कर फिलहाल प्रतिज्ञा पूरी कर लेंगे। नकली बूँदी के दुर्ग पर भी मेवाड़ की पताका फहराने के लिए उन्हें नाकों चने चबाने पड़े तथा उन्होंने अपने कुछ वीर सैनिकों को खो दिया। इसलिए उनका यह कहना बिलकुल ठीक है कि आज इस विजय में मेरी सबसे बड़ी पराजय हुई है। जो काम स्नेह से हो सकता था, उसके लिए शक्ति का प्रयोग ठीक नहीं है।

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मातृभूमि का मान
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पाठ 1.07: मातृभूमि का मान - स्वाध्याय [पृष्ठ ३१]

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बालभारती Hindi Kumarbharati Standard 9 Maharashtra State Board
पाठ 1.07 मातृभूमि का मान
स्वाध्याय | Q १ | पृष्ठ ३१

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