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आदर्श समाज के तीन तत्त्वों में से एक ‘भ्रातृता’ को रखकर लेखक ने अपने आदर्श समाज में स्त्रियों को भी सम्मिलित किया है अथवा नहीं? आप इस ‘भ्रातृता’ शब्द से कहाँ तक सहमत हैं? यदि नहीं तो आप क्या

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प्रश्न

आदर्श समाज के तीन तत्त्वों में से एक ‘भ्रातृता’ को रखकर लेखक ने अपने आदर्श समाज में स्त्रियों को भी सम्मिलित किया है अथवा नहीं? आप इस ‘भ्रातृता’ शब्द से कहाँ तक सहमत हैं? यदि नहीं तो आप क्या शब्द उचित समझेंगे/समझेंगी?
सविस्तर उत्तर
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उत्तर

आदर्श समाज के तीन तत्वों - स्वतंत्रता, समता और भ्रातृता - में से भ्रातृता को आधार बनाकर लेखक ने अपने आदर्श समाज में स्त्रियों को भी सम्मिलित किया है। केवल स्त्रियों को ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को उन्होंने अपने आदर्श समाज का अंग माना है। उनके आदर्श समाज में प्रत्येक बच्चे, युवा, लड़के-लड़कियाँ, पुरुष और स्त्री सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं। हर व्यक्ति स्वतंत्र है। समाज के प्रत्येक मनुष्य में पारस्परिक भाईचारे की भावना विद्यमान है। सभी बंधुत्व की भावना से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यहाँ प्रत्येक व्यक्ति का भाईचारा दूध और पानी के मिश्रण के समान है। जैसे दूध और पानी मिलकर अलग नहीं हो सकते, उसी प्रकार इस आदर्श समाज में प्रत्येक व्यक्ति एक-दूसरे से पृथक नहीं हो सकता| प्रत्येक मनुष्य अपने साथियों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव रखता है। समाज में इतना गहरा भाईचारा है कि कोई भी इच्छित परिवर्तन समाज के एक छोर से दूसरे छोर तक तुरंत पहुँच जाता है। समाज के सभी लोग विविध हितों में भागीदार हैं और सभी उनकी रक्षा के प्रति सजग रहते हैं।

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मेरी कल्पना का आदर्श समाज
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पाठ 15: बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर (श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज) - अभ्यास [पृष्ठ १२६]

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एनसीईआरटी Hindi Aaroh Bhag 2 [English] Class 12
पाठ 15 बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर (श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज)
अभ्यास | Q 6. | पृष्ठ १२६
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