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Chapters
2: उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
3: उत्पादन तथा लागत
▶ 4: पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्तिथि में फर्म का सिद्धांत
5: बाज़ार संतुलन
![NCERT solutions for व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय [हिंदी] कक्षा ११ chapter 4 - पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्तिथि में फर्म का सिद्धांत NCERT solutions for व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय [हिंदी] कक्षा ११ chapter 4 - पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्तिथि में फर्म का सिद्धांत - Shaalaa.com](/images/vyashti-arthashastra-ek-parichay-hindi-class-11_6:201962e624a64a618500ccb273ca4629.jpg)
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Solutions for Chapter 4: पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्तिथि में फर्म का सिद्धांत
Below listed, you can find solutions for Chapter 4 of CBSE NCERT for व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय [हिंदी] कक्षा ११.
NCERT solutions for व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय [हिंदी] कक्षा ११ 4 पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्तिथि में फर्म का सिद्धांत अभ्यास [Pages 78 - 80]
एक पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार की क्या विशेषताएँ हैं?
एक फर्म की संप्राप्ति, बाजार कीमत तथा उसके द्वारा बेची गई मात्रा में क्या संबंध है?
कीमत रेखा क्या है?
एक कीमत-स्वीकारक फर्म का कुल संप्राप्ति वक्र, ऊपर की ओर प्रवणता वाली सीधी रेखा क्यों होती है? यह वक्र उद्गम से होकर क्यों गुजरता है?
एक कीमत-स्वीकारक फर्म का बाजार कीमत तथा औसत संप्राप्ति में क्या संबंध है?
एक कीमत-स्वीकारक फर्म की बाजार कीमत तथा सीमान्त संप्राप्ति में क्या संबंध है?
एक पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार में लाभ-अधिकतमीकरण फर्म की सकारात्मक उत्पादन करने की क्या शर्ते हैं?
क्या प्रतिस्पर्धी बाजार में लाभ-अधिकतमीकरण फर्म जिसकी बाजार कीमत सीमान्त लागत के बराबर नहीं है, उसकी निर्गत का स्तर सकारात्मक हो सकता है। व्याख्या कीजिए।
क्या एक प्रतिस्पर्धी बाजार में कोई लाभ-अधिकतमीकरण फर्म सकारात्मक निर्गत स्तर पर उत्पादन कर सकती है, जब सीमान्त लागत घट रही हो। व्याख्या कीजिए।
क्या अल्पकाल में प्रतिस्पर्धी बाजार में लाभ - अधिकतमीकरण फर्म सकारात्मक स्तर पर उत्पादन कर सकती है, यदि बाजार कीमत न्यूनतम औसत परिवर्ती लागत से कम है। व्याख्या कीजिए।
क्या दीर्घकाल में स्पर्धी बाजार में लाभ-अधिकतमीकरण फर्म सकारात्मक स्तर पर उत्पादन कर सकती है? यदि बाजार कीमत न्यूनतम औसत लागत से कम है, व्याख्या कीजिए।
अल्पकाल में एक फर्म का पूर्ति वक्र क्या होता है?
दीर्घकाल में एक फर्म का पूर्ति वक्र क्या होता है?
प्रौद्योगिकीय प्रगति एक फर्म के पूर्ति वक्र को किस प्रकार प्रभावित करती है?
इकाई कर लगाने से एक फर्म के पूर्ति वक्र को किस प्रकार प्रभावित करता
किसी आगत की कीमत में वृद्धि एक फर्म के पूर्ति वक्र को किस प्रकार प्रभावित करता है?
बाजार में फर्मों की संख्या में वृद्धि, बाजार पूर्ति वक्र को किस प्रकार प्रभावित करता है?
पूर्ति की कीमत लोच का क्या अर्थ है? हम इसे कैसे मापते हैं?
निम्न तालिका में कुल संप्राप्ति, सीमांत संप्राप्ति तथा औसत संप्राप्ति का परिकलन कीजिए। वस्तु की प्रति इकाई कीमत 10 ₹ है।
| बेचीं गई मात्रा | कुल संप्राप्ति | सीमांत संप्राप्ति | औसत संप्राप्ति |
| 0 | |||
| 1 | |||
| 2 | |||
| 3 | |||
| 4 | |||
| 5 | |||
| 6 |
निम्न तालिका में एक प्रतिस्पर्धी फर्म की कुल संप्राप्ति तथा कुल लागत सारणियों को दर्शाया गया है। प्रत्येक उत्पादन स्तर के लाभ की गणना कीजिए। वस्तु की बाजार कीमत भी निर्धारित कीजिए।
| बेची गई मात्रा | (कुल संप्राप्ति) रु | (कुल लागत)रु | लाभ |
| 0 | 0 | 5 | |
| 1 | 5 | 7 | |
| 2 | 10 | 10 | |
| 3 | 15 | 12 | |
| 4 | 20 | 15 | |
| 5 | 25 | 23 | |
| 6 | 30 | 33 | |
| 7 | 35 | 40 |
निम्न तालिका में एक प्रतिस्पर्धी फर्म की कुल लागत सारणी को दर्शाया गया है। वस्तु की कीमत ₹10 दी हुई है। प्रत्येक उत्पादन स्तर पर लाभ की गणना कीजिए। लाभ-अधिकतमीकरण निर्गत स्तर ज्ञात कीजिए।
| उत्पादन | कुल लागत (इकाई) (रु) |
| 0 | 5 |
| 1 | 15 |
| 2 | 22 |
| 3 | 27 |
| 4 | 31 |
| 5 | 38 |
| 6 | 49 |
| 7 | 63 |
| 8 | 81 |
| 9 | 101 |
| 10 | 123 |
दो फर्मों वाले एक बाजार को लीजिए। निम्न तालिका दोनों फर्मों के पूर्ति सारणियों को दर्शाती है- SS1 कॉलम में फर्म-1 की पूर्ति सारणी, कॉलम SS2 में फर्म 2 की पूर्ति सारणी है। बाजार पूर्ति सारणी का परिकलन कीजिए।
| कीमत | SS1 इकाइयां | SS2 इकाइयां |
| 0 | 0 | 0 |
| 1 | 0 | 0 |
| 2 | 0 | 0 |
| 3 | 1 | 1 |
| 4 | 2 | 2 |
| 5 | 3 | 3 |
| 6 | 4 | 4 |
एक दो फर्मों वाले बाजार को लीजिए। निम्न तालिका में कॉलम SS1 तथा कालम SS2 क्रमशः फर्म-1 तथा फर्म-2 के पूर्ति सारणियों को दर्शाते हैं। बाजार पूर्ति सारणी का परिकलन कीजिए।
| कीमत (रु) | SS1 (किलो) | SS2 (किलो) |
| 0 | 0 | 0 |
| 1 | 0 | 0 |
| 2 | 0 | 0 |
| 3 | 1 | 0 |
| 4 | 2 | 0.5 |
| 5 | 3 | 1 |
| 6 | 4 | 1.5 |
| 7 | 5 | 2 |
| 8 | 6 | 2.5 |
एक बाजार में 3 समरूपी फर्म हैं। निम्न तालिका फर्म-1 की पूर्ति सारणी दर्शाती है। बाजार पूर्ति सारणी को परिकलन कीजिए।
| कीमत (रु) | SS1 (इकाई) |
| 0 | 0 |
| 1 | 0 |
| 2 | 2 |
| 3 | 4 |
| 4 | 6 |
| 5 | 8 |
| 6 | 10 |
| 7 | 12 |
| 8 | 14 |
10 ₹ प्रति इकाई बाजार कीमत पर एक फर्म की संप्राप्ति 50 ₹ है। बाजार कीमत बढ़कर 15 ₹ हो जाती है और अब फर्म को 150 ₹ की संप्राप्ति होती है। पूर्ति वक्र की कीमत लोच क्या है?
एक वस्तु की बाजार कीमत 5 ₹ से बदलकर 20 ₹ हो जाती है। फलस्वरूप फर्म पूर्ति की मात्रा 15 इकाई बढ़ जाती है। फर्म के पूर्ति वक्र की कीमत लोच 0.5 है। फर्म का आरंभिक तथा अंतिम निर्गत स्तर ज्ञात करें।
10 ₹ बाजार कीमत पर एक फर्म निर्गत की 4 इकाइयों की पूर्ति करती है। बाजार कीमत बढ़कर 30 ₹ हो जाती है। फर्म की पूर्ति की कीमत लोच 1.25 है। नई कीमत पर फर्म कितनी मात्रा की पूर्ति करेगी?
Solutions for 4: पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्तिथि में फर्म का सिद्धांत
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NCERT solutions for व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय [हिंदी] कक्षा ११ chapter 4 - पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्तिथि में फर्म का सिद्धांत
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Concepts covered in व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय [हिंदी] कक्षा ११ chapter 4 पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्तिथि में फर्म का सिद्धांत are पूर्ण प्रतिस्पर्धा: पारिभाषिक लक्षण, संप्राप्ति, लाभ अधिकतमीकरण, एक फर्म का पूर्ति वक्र, फर्म के पूर्ति वक्र के निर्धारक तत्व, बाज़ार पूर्ति वक्र, पूर्ति की कीमत लोच.
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