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Chapters
1: जयशंकर प्रसाद (देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत)
2: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (गीत गाने दो मुझे, सरोज स्मृति)
3: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (यह दिप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद)
4: केदारनाथ सिंह (बनारस, दिशा)
5: विष्णु खरे (एक कम, सत्य)
6: रघुवीर सहाय (वसंत आया, तोड़ो)
7: तुलसीदास (भरत-राम का प्रेम, पद)
8: मलिक मुहम्मद जायसी (बरहमासा)
9: विद्यापति (पद)
10: केशवदास (रामचंद्रिका)
11: घनानंद (कवित्त/सवैया)
गद्य खंड
1: रामचंद्र शुक्ल (प्रेमघन की छाया-स्मृति)
▶ 2: पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी (सुमिरिनी के मनके)
3: ब्रजमोहन व्यास (कच्चा चिट्ठा)
4: फणीश्वरनाथ 'रेणु' (संवदिया)
5: भीष्म साहनी (गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात)
6: असगर वजाहत (शेर, पहचान, चार हाथ. साझा)
7: निर्मल वर्मा (जँहा कोई वापसी नहीं)
8: रामविलास शर्मा (यथास्मै रोचते विश्वम्)
9: ममता कालिया (दूसरा देवदास)
10: हजारी प्रसाद द्विवेदी (कुटज)
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Solutions for Chapter 2: पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी (सुमिरिनी के मनके)
Below listed, you can find solutions for Chapter 2 of CBSE NCERT for हिन्दी अंतरा भाग २ [अंग्रेजी] कक्षा १२.
NCERT solutions for हिन्दी अंतरा भाग २ [अंग्रेजी] कक्षा १२ 2 पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी (सुमिरिनी के मनके) प्रश्न-अभ्यास [Pages 84 - 86]
बालक बच गया
बालक से उसकी उम्र और योग्यता से ऊपर के कौन-कौन से प्रश्न पूछे गए?
बालक बच गया
ज्ञान के क्षेत्र में 'रटने' का निषेध है किंतु क्या आप रटने में विश्वास करते हैं। अपने विचार प्रकट कीजिए।
बालक ने क्यों कहा कि मैं यावज्जन्म लोकसेवा करूँगा?
बालक द्वारा इनाम में लड्डू माँगने पर लेखक ने सुख की साँस क्यों भरी?
बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटना अनुचित है, पाठ में ऐसा आभास किन स्थलों पर होता है कि उसकी प्रवृत्तियों का गला घोटा जाता है?
"बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि वह लड्डू की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखानेवाली खड़खड़ाहट नहीं" कथन के आधार पर बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
उम्र के अनुसार बालक में योग्यता का होना अवसक है किन्तु उसका यानि या प्रदासनिक होना जरुरी नहीं लर्निग आउटकम के बारे में विचार कीजिये
योग्यता विस्तार
बालक बच गया
बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों के विकास में 'रटना' बाधक है- कक्षा में संवाद कीजिए।
घडी के पुर्जे
लेखक ने धर्म का रहस्य जानने के लिए 'घड़ी के पुर्ज़े' का दृष्टांत क्यों दिया है?
घडी के पुर्जे
धर्म संबंधी अपनी मान्यता पर लेख/निबंध लिखिए।
घडी के पुर्जे
'धर्म का रहस्य जानना सिर्फ़ धर्माचार्यों का काम नहीं, कोई भी व्यक्ति अपने स्तर पर उस रहस्य को जानने की कोशिश कर सकता है, अपनी राय दे सकता है'- टिप्पणी कीजिए।
'धर्म का रहस्य जानना वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों का ही काम है।' आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं? धर्म संबंधी अपने विचार व्यक्त कीजिए।
घड़ी समय का ज्ञान कराती है। क्या धर्म संबंधी मान्यताएँ या विचार अपने समय का बोध नहीं कराते?
धर्म अगर कुछ विशेष लोगों वेदशास्त्र, धर्माचार्यों, मठाधीशों, पंडे-पुजारियों की मुट्ठी में है तो आम आदमी और समाज का उससे क्या संबंध होगा? अपनी राय लिखिए।
'जहाँ धर्म पर कुछ मुट्ठीभर लोगों का एकाधिकार धर्म को संकुचित अर्थ प्रदान करता है वहीं धर्म का आम आदमी से संबंध उसके विकास एवं विस्तार का द्योतक है।' तर्क सहित व्याख्या कीजिए।
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
'वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों का ही काम है कि घड़ी के पुर्ज़े जानें, तुम्हें इससे क्या?'
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
'अनाड़ी के हाथ में चाहे घड़ी मत दो पर जो घड़ीसाज़ी का इम्तहान पास कर आया है, उसे तो देखने दो।'
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
'हमें तो धोखा होता है कि परदादा की घड़ी जेब में डाले फिरते हो, वह बंद हो गई है, तुम्हें न चाबी देना आता है न पुर्ज़े सुधारना, तो भी दूसरों को हाथ नहीं लगाने देते।'
ढेले चुन लो
वैदिककाल में हिंदुओं में कैसी लौटरी चलती थी जिसका ज़िक्र लेखक ने किया है।
ढेले चुन लो
समाज में धर्म संबंधी अंधविश्वास पूरी तरह व्याप्त है। वैज्ञानिक प्रगति के संदर्भ में धर्म, विश्वास और आस्था पर निबंध लिखिए।
अपने घर में या आस-पास दिखाई देने वाले किसी रिवाज या अंधविश्वास पर एक लेख लिखिए।
'दुर्लभ बंधु' की पेटियों की कथा लिखिए।
जीवन साथी का चुनाव मिट्टी के ढेलों पर छोड़ने के कौन-कौन से फल प्राप्त होते हैं।
मिट्टी के ढेलों के संदर्भ में कबीर की साखी की व्याख्या कीजिए-
पत्थर पूजे हरि मिलें तो तू पूज पहार।
इससे तो चक्की भली, पीस खाय संसार।।
जन्म भर के साथी का चुनाव मिटटी के ढेले पर छोड़ना बुद्धिमानी नहीं है इसीलिए बेटी को शिक्छित होना अनिवार्य है बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ के सन्दर्भ में विचार कीजिये
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
'अपनी आँखों से जगह देखकर, अपने हाथ से चुने हुए मिट्टी के डगलों पर भरोसा करना क्यों बुरा है और लाखों करोड़ों कोस दूर बैठे बड़े-बड़े मट्टी और आग के ढेलों-मंगल, शनिश्चर और बृहस्पति की कल्पित चाल के कल्पित हिसाब का भरोसा करना क्यों अच्छा है।'
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
'आज का कबूतर अच्छा है कल के मोर से, आज का पैसा अच्छा है कल की मोहर से। आँखों देखा ढेला अच्छा ही होना चाहिए लाखों कोस के तेज पिंड से।'
Solutions for 2: पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी (सुमिरिनी के मनके)
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NCERT solutions for हिन्दी अंतरा भाग २ [अंग्रेजी] कक्षा १२ chapter 2 - पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी (सुमिरिनी के मनके)
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