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Science (Hindi Medium) कक्षा १२ - CBSE Question Bank Solutions

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"बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि वह लड्डू की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखानेवाली खड़खड़ाहट नहीं" कथन के आधार पर बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
Chapter: [2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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उम्र के अनुसार बालक में योग्यता का होना अवसक है किन्तु उसका यानि या प्रदासनिक होना जरुरी नहीं लर्निग आउटकम के बारे में विचार कीजिये

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
Chapter: [2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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घड़ी समय का ज्ञान कराती है। क्या धर्म संबंधी मान्यताएँ या विचार अपने समय का बोध नहीं कराते?

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
Chapter: [2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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लेखक ने धर्म का रहस्य जानने के लिए 'घड़ी के पुर्ज़े' का दृष्टांत क्यों दिया है?

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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'धर्म का रहस्य जानना वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों का ही काम है।' आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं? धर्म संबंधी अपने विचार व्यक्त कीजिए।

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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धर्म अगर कुछ विशेष लोगों वेदशास्त्र, धर्माचार्यों, मठाधीशों, पंडे-पुजारियों की मुट्ठी में है तो आम आदमी और समाज का उससे क्या संबंध होगा? अपनी राय लिखिए।

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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'जहाँ धर्म पर कुछ मुट्ठीभर लोगों का एकाधिकार धर्म को संकुचित अर्थ प्रदान करता है वहीं धर्म का आम आदमी से संबंध उसके विकास एवं विस्तार का द्योतक है।' तर्क सहित व्याख्या कीजिए।

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-

'वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों का ही काम है कि घड़ी के पुर्ज़े जानें, तुम्हें इससे क्या?'

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
'अनाड़ी के हाथ में चाहे घड़ी मत दो पर जो घड़ीसाज़ी का इम्तहान पास कर आया है, उसे तो देखने दो।'

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
'हमें तो धोखा होता है कि परदादा की घड़ी जेब में डाले फिरते हो, वह बंद हो गई है, तुम्हें न चाबी देना आता है न पुर्ज़े सुधारना, तो भी दूसरों को हाथ नहीं लगाने देते।'

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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वैदिककाल में हिंदुओं में कैसी लौटरी चलती थी जिसका ज़िक्र लेखक ने किया है।

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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'दुर्लभ बंधु' की पेटियों की कथा लिखिए।

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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जीवन साथी का चुनाव मिट्टी के ढेलों पर छोड़ने के कौन-कौन से फल प्राप्त होते हैं।

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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मिट्टी के ढेलों के संदर्भ में कबीर की साखी की व्याख्या कीजिए-

पत्थर पूजे हरि मिलें तो तू पूज पहार।
इससे तो चक्की भली, पीस खाय संसार।।

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
'अपनी आँखों से जगह देखकर, अपने हाथ से चुने हुए मिट्टी के डगलों पर भरोसा करना क्यों बुरा है और लाखों करोड़ों कोस दूर बैठे बड़े-बड़े मट्टी और आग के ढेलों-मंगल, शनिश्चर और बृहस्पति की कल्पित चाल के कल्पित हिसाब का भरोसा करना क्यों अच्छा है।'

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-

'आज का कबूतर अच्छा है कल के मोर से, आज का पैसा अच्छा है कल की मोहर से। आँखों देखा ढेला अच्छा ही होना चाहिए लाखों कोस के तेज पिंड से।'

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
Chapter: [2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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जन्म भर के साथी का चुनाव मिटटी के ढेले पर छोड़ना बुद्धिमानी नहीं है इसीलिए बेटी को शिक्छित होना अनिवार्य है बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ के सन्दर्भ में विचार कीजिये

[2.02] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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‘मुझे भाग्यहीन की तू संबल’ निराला की यह पंक्ति क्या ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे कार्यक्रम की माँग करती है।

[1.02] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : (क) गीत गाने दो मुझे, (ख) सरोज स्मृति
Chapter: [1.02] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : (क) गीत गाने दो मुझे, (ख) सरोज स्मृति
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पसोवा की प्रसिद्धि का क्या कारण था और लेखक वहाँ क्यों जाना चाहता था?

[2.03] ब्रजमोहन व्यास : कच्चा चिट्ठा
Chapter: [2.03] ब्रजमोहन व्यास : कच्चा चिट्ठा
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''मैं कहीं जाता हूँ तो 'छूँछे' हाथ नही लौटता'' से क्या तात्पर्य है? लेखक कौशांबी लौटते हुए अपने साथ क्या-क्या लाया?

[2.03] ब्रजमोहन व्यास : कच्चा चिट्ठा
Chapter: [2.03] ब्रजमोहन व्यास : कच्चा चिट्ठा
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