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English Medium कक्षा १० - CBSE Question Bank Solutions for Hindi Course - A

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Hindi Course - A
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‘तुम ही खाली करने वाले’ के माध्यम से कवि किनसे, क्या कहना चाहता है?

[1.04] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [1.04] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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कवि किसकी हँसी नहीं उड़ाना चाहता है और क्यों?

[1.04] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [1.04] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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उन तथ्यों का उल्लेख कीजिए जिनका उल्लेख कवि अपनी आत्मकथा में नहीं करना चाहता है?

[1.04] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [1.04] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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कवि ने अपने जीवन की उज्ज्वल गाथा किसे कहा है?

[1.04] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [1.04] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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कवि के लिए सुख दिवास्वप्न बनकर रह गए, स्पष्ट कीजिए।

[1.04] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [1.04] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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‘अनुरागिनी उषा लेती थी, जिन सुहाग मधुमाया, में’ के आलोक में कवि ने अपनी पत्नी के विषय में क्या कहना चाहता है?

[1.04] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [1.04] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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कवि ने अपनी तुलना किससे की है? उसके जीवन का पाथेय क्या है?

[1.04] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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‘आत्मकथ्य’ कविता के माध्यम से ‘प्रसाद’ जी के व्यक्तित्व की जो झलक मिलती है, वह उनकी ईमानदारी और साहस का प्रमाण है, स्पष्ट कीजिए।

[1.04] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [1.04] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
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कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर 'गरजने' के लिए कहता है, क्यों?

[1.05] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [1.05] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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कविता का शीर्षक उत्साह क्यों रखा गया है?

[1.05] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है?

[1.05] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [1.05] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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शब्दों का ऐसा प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है।उत्साह कविता में ऐसे कौन-से शब्द हैं जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद है, छाँटकर लिखें।

[1.05] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [1.05] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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जैसे बादल उमड़-घुमड़कर बारिश करते हैं वैसे ही कवि के अंतर्मन में भी भावों के बादल उमड़-घुमड़कर कविता के रूप में अभिव्यक्त होते हैं। ऐसे ही किसी प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर अपने उमड़ते भावों को कविता में उतारिए।

[1.05] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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कवि ने क्रांति लाने के लिए किसका आह्वान किया है और क्यों?

[1.05] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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कवि युवा कवियों से क्या आवान करता है?

[1.05] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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कवि ने ‘नवजीवन’ का प्रयोग बादलों के लिए भी किया है। स्पष्ट कीजिए।

[1.05] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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बादल आने से पूर्व प्राणियों की मनोदशा का चित्रण कीजिए।

[1.05] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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कवि निराला बादलों में क्या-क्या संभावनाएँ देखते हैं?

[1.05] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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कवि ने बादलों के किन-किन विशेषणों का प्रयोग किया है, स्पष्ट कीजिए।

[1.05] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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‘उत्साह’ कविता का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।

[1.05] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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