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एक व्यक्ति किसी मंदिर से 50 मी. की दूरी पर खड़ा होकर उस मंदिर के ऊपरी सिरे को देखता है, उस समय उस व्यक्ति द्वारा 45° का उन्नत कोण बनता है, तो उस मंदिर की ऊँचाई कितनी होगी, ज्ञात कीजिए।
Concept: त्रिकोणमिति का उपयोजन (Application of Trigonometry)
यदि `1/sin^2θ-1/cos^2θ-1/tan^2θ-1/cot^2θ-1/sec^2θ-1/("cosec"^2θ) = -3`, तो θ का मान ज्ञात कीजिए।
Concept: त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ
sin2θ + cos2θ का मान ज्ञात कीजिए।

हल:
Δ ABC में, ∠ABC = 90°, ∠C = θ°
AB2 + BC2 = `square` .....(पायथागोरस प्रमेय)
दोनों पक्षों में AC2 से भाग देने पर,
`"AB"^2/"AC"^2 + "BC"^2/"AC"^2 = "AC"^2/"AC"^2`
∴ `("AB"^2/"AC"^2) + ("BC"^2/"AC"^2) = 1`
परन्तु `"AB"/"AC" = square और "BC"/"AC" = square`
∴ `sin^2 theta + cos^2 theta = square`
Concept: त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ
किसी गोले की त्रिज्या 7 सेमी हो तो उसका पृष्ठफल ज्ञात कीजिए।
Concept: गोले का पृष्ठफल
किसी द्वैत्रिज्य की त्रिज्या 3.5 सेमी तथा उसके वृत्त चाप की लंबाई 2.2 सेमी हो तो द्वैत्रिज्य का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
Concept: द्वैत्रिज्य का क्षेत्रफल (Area of a Sector)
यदि शंकु के आधार की त्रिज्या 7 सेमी तथा ऊँचाई 24 सेमी है, तो शंकु की तिरछी ऊँचाई ज्ञात कीजिए?
Concept: शंकु पृष्ठफल
7 सेमी त्रिज्या वाले गोले का पृष्ठफल ज्ञात कीजिए।
हल:
गोले का पृष्ठफल = 4πr2
= `4 xx 22/7 xx square^2`
= `4 xx 22/7 xx square`
= `square xx 7`
∴ गोले का पृष्ठफल = `square` वर्ग सेमी
Concept: गोले का पृष्ठफल
शंकु छेद के वृत्ताकार भाग की त्रिज्याएँ क्रमश: 14 सेमी तथा 6 सेमी हैं तथा उसकी ऊँचाई 6 सेमी है, तो शंकु छेद का वक्रपृष्ठफल ज्ञात कीजिए।
(π = 3.14)
Concept: शंकु छेद (Frustum of the Cone)
आइस्क्रीम का बर्तन लंबवृत्ताकर बेलन के आकार का है जिसके आधार की त्रिज्या 12 सेमी तथा ऊँचाई 7 सेमी है। यह बर्तन आइस्क्रीम से पूर्णत: भरा है। पूर्ण आइस्क्रीम विद्यार्थियों को आइस्क्रीम शंक्वाकार कोन में बांटी गई जिसके खुले भाग का व्यास 4 सेमी तथा ऊँचाई 3.5 सेमी है। यदि प्रत्येक विद्यार्थी को एक शंक्वाकार कोन दिया गया हो, तो ऐसे कितने विद्यार्थियों को आइस्क्रीम बाँटी गई?
Concept: शंकु का घनफल
किसी लंबवृत्ताकार बेलन की त्रिज्या 12 सेमी है जिसमें 20 सेमी ऊँचाई तक पानी भरा है। एक गोलाकार धातु की गेंद उसमें डुबाने पर पानी की ऊँचाई 6.75 सेमी कैसे बढ़ती है, तो उस धातु की गेंद की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
Concept: गोले का घनफल (Volume of Sphere)

ऊपर दी गयी आकृति में `square`ABCD एक वर्ग है और एक वृत उसमें अंतर्लिखित है। वर्ग की सभी भुजायें वृत्त को स्पर्श करती हैं।
यदि AB = 14 सेमी, तो रेखांकित भाग का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल:
वर्ग का क्षेत्रफल = `(square)^2` ...(सूत्र)
= 142
= `square` वर्ग सेमी
∴ वृत्त का क्षेत्रफल = `square` ...(सूत्र)
= `22/7 xx 7 xx 7`
= 154 वर्ग सेमी
∴ रेखांकित भाग का क्षेत्रफल = (वर्ग का क्षेत्रफल) - (वृत्त का क्षेत्रफल)
= 196 - 154
= `square` वर्ग सेमी
Concept: वृत्तखंड (Segment of a Circle)
समय-स्तम्भमेलनं कुरुत।
| 'अ' | 'आ' | |
| (1) | पञ्चवादनम् | ६.३० |
| (2) | सपाद अष्टवादनम् | ५.०० |
| ८.१५ |
Concept: समयः।
चित्रं दृष्ट्वा नामानि लिखत।
![]() |
| __________ |
Concept: चित्रपदकोष:।
समय-स्तम्भमेलनं कुरुत।
| 'अ' | 'आ' |
| (1) सार्ध षड्वादनम् | १.१० |
| (2) दशाधिक-एकवादनम् | ३.०० |
| ६.३० |
Concept: समयः।
समानार्थकशब्दं लिखत।
धनुः = ......।
Concept: आद्यकृषकः पृथुवैन्यः।
विरुद्धार्थकशब्दं लिखत ।
स्तुतिः × ______।
Concept: आद्यकृषकः पृथुवैन्यः।
गद्यांशं पठित्वा निर्दिष्टा: कृती: कुरुत।
|
भूपालः पृथुवैन्यः नाम धरायां प्रथमः अभिषिक्तः सम्राट्। प्रयागक्षेत्रे पृथुनृपस्य राजधानी आसीत्।राज्याभिषेकसमये चारणा: पृथुनृपस्य स्तुतिं गातुमुत्सुका:। तदा पृथु: आज्ञापयत्, “तिष्ठन्तु चारणा:। यावत् मम सद्गुणा: न प्रकटीभवन्ति तावदहं न स्तोतव्य:। स्तवनं तु ईश्वरस्यैव भवेत्।” स्तुतिगायका: पृथुनृपस्य एतादृशीं नि: स्पृहतां ज्ञात्वा प्रसन्नाः अभवन्। एकदा पृथुराजः स्वराज्ये भ्रमणम् अकरोत्। भ्रमणसमये तेन दृष्टं यत् प्रजा: अतीव कृशाः अशक्ताश्च। ताः प्रजा: पशुवज्जीवन्ति। निकृष्टान्नं खादन्ति। तद् दृष्ट्वा राजा चिन्ताकुल: जात:। तदा पुरोहितोऽवदत्, “हे राजन्, धनधान्यादि सर्वं वस्तुजातं वस्तुत: वसुन्धराया: उदर एव वर्तते। तत्प्राप्तुं यतस्व।" |
(1) अवबोधनम्। (3 तः 2) 2
(क) उचितं पर्यायं चित्वा वाक्यं पुनर्लिखत। 1
(1) ______ पृथुनृपस्य राजधानी आसीत्। (काक्षीक्षेत्रे/प्रयागक्षेत्रे)
(2) स्तवनं तु ______ भवेत्। (मानवस्यैव/ईश्वरस्यैव)
(ख) पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत। 1
चारणा: किमर्थम् उत्सुका:?
(ग) अमरकोषात् शब्दं योजयित्वा वाक्यं पुनर्लिखत। 1
राजा चिन्ताकुल: जात:।
(2) गद्यांशं पठित्वा जालरेखाचित्रं पूरयत। 2

Concept: आद्यकृषकः पृथुवैन्यः।
विरुद्धार्थकशब्दं लिखत।
बद्धः × ......।
Concept: व्यसने मित्रपरीक्षा।
गद्यांशं पठित्वा निर्दिष्टाः कूतीः कुरुत।
| अस्ति एकं चम्पकं नाम अरण्यम्। अरण्ये चित्राङ्गो नाम मृगः एकाक्षो नाम काकश्च स्नेहेन निवसतः स्म। एकदा चित्राङ्गः वने भ्रमन् केनापि शृगालेन अवलोकितः क्षुद्र्बुद्धि: नाम सः शृगालः स्वार्थहेतुना मृगेण सह मित्रताम् ऐच्छत्। अस्तङ्गते सवितरि क्षुद्र्बुद्धि: मृगेण सह मृगस्य निवासस्थानं गतः। मृगशृगालौ दृष्ट्वा काकोऽवदत्, "सखे, चित्राङ्गः! कोऽयं द्वितीयः?" मृगः अब्रवीत्, "जम्बूकोऽयम्। अस्मत्सख्यम् इच्छति।" काकः उपादिशत्, ''अकस्मादागन्तुना सह मित्रता न युक्ता।'' तदाकर्ण्य जम्बूकः सकोपम् आह, "मृगस्य प्रथम दर्शने भवानपि अपरिचितः एव आसीत्। यथायं मृगः मम बन्धुः तथा भवानपि।" मृगः अब्रवीत्, "अलं विवादेन। वयं सर्वे आनन्देन एकत्र निवसामः।" काकेनोक्तम् “एवमस्तु।'' |
(1) अवबोधनम्। (3 तः 2) (2)
(क) उचितं कारणं चित्वा वाक्यं पुनर्लिखत। (1)
शृगालः मृगेण सह सख्यम् इच्छति यतः ______।
(1) शृगालः मृगमांसं खादितुम् इच्छति।
(2) शृगालः मृगे स्निह्यति।
(ख) कः कं वदति? (1)
“अकस्मादागन्तुना सह मित्रता न युक्ता"।
(ग) पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत। (1)
अरण्ये कौ निवसतः स्म?
(2) शब्दज्ञानम्। (3 तः 2) (2)
(क) गदयाशात् 2 प्रथमाविभक्त्यन्तपदे चित्वा लिखत। (1)
(ख) गद्यांशात् विशेषण-विशेष्ययोः मेलनं कुरुत। (1)
| 'अ' | 'आ' | |
| (1) | भ्रमन् | एकाक्षः |
| (2) | अस्तङ्गते | चित्राङ्गः |
| सवितरि |
(ग) पूर्वपदं/उत्तरपदं लिखत। (1)
(1) केनापि = केन + ______ ॥
(2) जम्बकोऽयम् = ______ + अयम्।
Concept: व्यसने मित्रपरीक्षा।


