Advertisements
Advertisements
प्रश्न
'व्यक्ति की करनी और कथनी में अंतर होता है, इस उक्ति पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
Advertisements
उत्तर
ईश्वर की इस सृष्टि में मनुष्य अन्य सभी प्राणियों से श्रेष्ठ है। परंतु यह सर्वश्रेष्ठ मानव अनेक अवसरों पर अनेक ऐसे काम करता है, जिन्हें वह स्वयं गलत बताया करता है। कई लोग बातें तो आदर्शों की करते हैं, परंतु स्वयं आदर्शों से बहुत दूर रहते हैं। धर्म की, ज्ञान की बातें तो खूब करते हैं, परंतु धर्म को अपने जीवन में धारण नहीं करते। कहा भी गया है कहना आसान है किंतु करके दिखाना बड़ा कठिन होता है। कहने में केवल जीभ हिलानी पड़ती है, जबकि करने में मेहनत करनी पड़ती है। करनी और कथनी में अंतर आज के समय में पहले की अपेक्षा बढ़ गया है। मनुष्य की करनी और कथनी में अंतर नहीं होना चाहिए। व्यक्ति जो कहता है, उसे वही करना चाहिए। व्यक्ति का गौरव उसकी कथनी से है। उसकी वाणी से है। उसके वादों से है। उसकी घोषणाओं से है। उसके इरादों से है। उसके संकल्पों से है। कुछ भी कहने से पहले यह ध्यान में होना चाहिए कि मैं जो कह रहा हूँ, उस पर लोग विश्वास करते हैं, उससे आशा करते हैं। इसलिए जो भी कहा जा रहा है, उसके समान आचरण भी होना चाहिए। करनी और कथनी में समानता होने से हम सम्मान पाते हैं।
