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प्रश्न
वर्षा से जुड़ी किसी प्राचीन कथा या लोककथा को इस कविता से जोड़कर एक कहानी तैयार कीजिए।
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उत्तर
बहुत पुरानी बात है। एक गाँव में कई वर्षों तक वर्षा नहीं हुई। तालाब सूख गए, फसलें मुरझा गईं और पशु-पक्षी प्यास से तड़पने लगे। चिंतित गाँव वाले बुजुर्गों के पास गए। बुजुर्गों ने बताया कि पुराने समय में जब वर्षा नहीं होती थी, तो लोग मेंढकों का विवाह करते थे। वैदिक काल के 'मेंढक सूक्त' में भी मेंढकों की टर्राहट को वर्षा की अगवानी कहा गया है, इसलिए मेंढकों को वर्षा देवता इंद्र का प्रिय माना जाता है।
गाँव वालों ने विधि-विधान से दो मेंढकों का विवाह कराया और सब मिलकर वर्षा देवता की वंदना करने लगे – “हे इंद्र देव! हमपर कृपा करके वर्षा बरसाओ।”
देखते ही देखते आकाश में घनघोर बादल छा गए। बिजली चमकी, बादल गरजे और झमाझम वर्षा होने लगी। झरने बहने लगे और तालाब भर गए। खुशी से मोर नृत्य करने लगे और मेंढक सुगीत गाने लगे। मालिनों ने सुंदर गीत गाए और किसानों का मन मुस्कुरा उठा। पूरा गाँव 'वर्षा-बहार' की तरह महक उठा। उस दिन से लोग कहने लगे कि प्रकृति से प्रेम और श्रद्धा रखो, तो वह बरसात के रूप में अपना आशीर्वाद देती है।
