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“वन में जितने पंछी हैं, खंजन, कपोत, चातक, कोकिल; काक, हंस, शुक आदि वास करते सब आपस में हिलमिल!” वन में सारे पक्षी एक साथ रह रहे हैं, हमारे परिवेश में भी पशु-पक्षी साथ रहते हैं।

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प्रश्न

“वन में जितने पंछी हैं, खंजन,
कपोत, चातक, कोकिल;

काक, हंस, शुक आदि वास
करते सब आपस में हिलमिल!”

वन में सारे पक्षी एक साथ रह रहे हैं, हमारे परिवेश में भी पशु-पक्षी साथ रहते हैं। आप विचार कीजिए कि हमारे परिवेश में उनका रहना क्यों आवश्यक है?

विस्तार में उत्तर
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उत्तर

हमारे परिवेश में पशु-पक्षियों का रहना आवश्यक है, क्योंकि–

  1. प्रकृति का संतुलन: सभी जीव एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं (खाद्य श्रृंखला)। पशु-पक्षी प्रकृति का संतुलन बनाए रखते हैं। इनमें से कोई एक भी जीव समाप्त हो जाए तो पूरा संतुलन बिगड़ जाता है।
  2. फसलों की रक्षा: पक्षी कीट-पतंगों और चूहों जैसे हानिकारक जीवों को खाकर फसलों तथा पेड़ों की रक्षा करते हैं।
  3. परागण और बीज फैलाना: चिड़ियाँ तथा मधुमक्खियाँ फूलों का परागण करती हैं और पक्षी बीजों को दूर-दूर तक फैलाते हैं, जिससे नए पौधे उगते हैं।
  4. मनुष्य की सहायता: गाय-भैंस हमें दूध देती हैं, बैल खेती में मदद करते हैं, कुत्ता घर की रक्षा करता है और ऊँट-गधे बोझ ढोते हैं।
  5. सौंदर्य और आनंद: चिड़ियों की मधुर आवाज़ और खुले आकाश में उनका स्वतंत्र उड़ना प्रकृति को सुंदर और जीवंत बनाता है।
  6. अच्छा जीवन सिखाना: कविता में चिड़िया हमें मिल-जुलकर रहना, लोभ छोड़ना और अपने श्रम से जीना सिखाती है। इस तरह पशु-पक्षी हमें प्रेम, एकता और निःस्वार्थ जीवन की प्रेरणा भी देते हैं।
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अध्याय 9: चिड़िया - पाठ से आगे [पृष्ठ १२४]

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एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
अध्याय 9 चिड़िया
पाठ से आगे | Q 1. | पृष्ठ १२४
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