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प्रश्न


“सीमा-हीन गगन में उड़ते,
निर्भय विचरण करते हैं”
कविता की इन पंक्तियों को पढ़िए और इन चित्रों को देखिए। इन चित्रों को देखकर आपके मन में क्या विचार आ रहे हैं?
(संकेत– जैसे इन चित्रों में कौन निर्भय विचरण कर रहा है?)
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उत्तर
इन चित्रों को देखकर स्वतंत्र जीवन और बंदी जीवन का अंतर साफ दिखता है।
पहले चित्र में शेर अपने घर अर्थात जंगल में निर्भय होकर विचरण कर रहा है। वह खुले आसमान के नीचे स्वतंत्र भाव से घूम-फिर रहा है। ठीक ऐसे ही कविता में पक्षी ‘सीमा-हीन गगन में उड़कर’ निर्भय विचरण करते हैं। अर्थात इन चित्रों में शेर ही निर्भय विचरण कर रहा है, क्योंकि वह अपने प्राकृतिक घर में स्वतंत्र है।
दूसरे चित्र में वही शेर चिड़ियाघर के पिंजरे में बंद पड़ा है। उसकी स्वतंत्रता छिन गई है। लोग उसे तरह-तरह से घूरकर देख रहे हैं, पर शेर चाहकर भी कहीं नहीं जा सकता। उसकी दुनिया अब पिंजरे तक सीमित हो गई है।
इन चित्रों को देखकर मन में यह विचार आता है कि स्वतंत्रता ही सच्चे जीवन की सबसे बड़ी खुशी है। जो प्राणी बंदी बन जाता है, उसकी खुशी, गरिमा और जीवन-शक्ति सब मिट जाते हैं। इसी संदेश को कवि ने चिड़िया के माध्यम से दिया है पक्षी खुले गगन में स्वच्छंद रहते हैं, उनके मन में लोभ और पाप नहीं है, और वे मिल-जुलकर रहते हैं। इसके विपरीत मनुष्य अपनी बनाई 'सोने की कड़ियों' में जकड़ा हुआ है। कवि चाहते हैं कि मनुष्य पक्षियों से प्रेम, करुणा, संतोष, मिल-जुलकर रहना और निर्भय, स्वतंत्र जीवन जीने की रीति सीखे।
