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वन को एक संसाधन के रूप में चुनिए, एवं भारत में वन संरक्षण का ऐतिहासिक विवरण राजस्थान एवं उत्तरांचल में ‘चिपको आन्दोलन’ पर प्रकाश डालते हुए प्रस्तुत कीजिए।

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प्रश्न

वन को एक संसाधन के रूप में चुनिए, एवं

भारत में वन संरक्षण का ऐतिहासिक विवरण राजस्थान एवं उत्तरांचल में ‘चिपको आन्दोलन’ पर प्रकाश डालते हुए प्रस्तुत कीजिए।

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

  1. राजस्थान में वन संरक्षण के ऐतिहासिक विवरण के अनुसार 18वीं सदी के मध्य में जोधपुर के राजा ने अपने कर्मचारियों से स्थानीय क्षेत्रों से पेड़ काटकर लकड़ियाँ लाने के लिए कहा था। कर्मचारी जब जोधपुर राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों से पेड़ों को काटकर लकड़ियाँ प्राप्त करने गए तो ग्रामीणों ने उनका विरोध किया। जब इस विरोध की सूचना कर्मचारियों ने राजा को दी तो राजा ने क्रोधित होकर विरोध करने वालों की हत्या करने का भी आदेश दे दिया। कर्मचारी राजा का आदेश मानकर पेड़ों को काटने के लिए पुनः ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँच गए और उन्होंने पेड़ों को काटने का विरोध करने वालों की हत्या भी कर दी। कई लोगों की जान जाने के बावजूद ग्रामीणों ने पेड़ों को काटने का विरोध नहीं छोड़ा। जब यह बात राजा को पता चली तो उन्होंने पेड़ काटने का आदेश वापस ले लिया। इस तरह से अपनी जान गॅवाकर भी ग्रामीणों ने वन को संरक्षण प्रदान किया।
  2. उत्तरांचल में वन संरक्षण का ऐतिहासिक विवरण – चिपको आंदोलन की शुरुआत उत्तरांचल के दो-तीन गाँवों से हुई थी। इसके पीछे एक कहानी है। गाँववालों ने वन विभाग से कहा कि खेती-बाड़ी के औज़ार बनाने के लिए हमें पेड़ काटने की अनुमति दी जाए। वन विभाग ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। बहरहाल, विभाग ने खेल-सामग्री के एक विनिर्माता कम्पनी को जमीन का वही टुकड़ा व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए आवंटित कर दिया। इससे गाँववालों में रोष पैदा हुआ और उन्होंने सरकार के इस कदम का विरोध किया। यह विरोध जल्दी ही उत्तरांचल के अन्य क्षेत्रों में भी फैल गया। क्षेत्र की पारिस्तिथिकी और आर्थिक शोषण के बड़े सवाल उठने लगे। गाँववालों ने माँग की कि जंगल की कटाई का कोई भी ठेका बाहरी व्यक्ति को नहीं दिया जाना चाहिए और स्थानीय लोगों का जंगल, जल, जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर कारगर नियंत्रण होना चाहिए। लोग चाहते थे कि सरकार लघु उद्योगों के लिए कम कीमत की सामग्री उपलब्ध कराए। लोग सरकार की नीतियों का विरोध जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करके कर रहे थे। जब गाँव के पुरुष जिला मुख्यालय पर धरना दे रहे थे, उसी समय खेल-सामग्री बनाने वाली कंपनी ने गाँव में जाकर पेड़ों की कटाई शुरू कर दी। इस स्थिति को देखकर ग्रामीण महिलाओं ने पेड़ों से चिपककर पेड़ों की रक्षा की, जिसे ‘चिपको आंदोलन’ के नाम से जाना गया।
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अध्याय 1: भूगोल एक विषय के रूप में - अभ्यास [पृष्ठ १२]

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एनसीईआरटी Bhautik Bhugol ke Mool Sidhant [Hindi] Class 11
अध्याय 1 भूगोल एक विषय के रूप में
अभ्यास | Q (अ) (iii) | पृष्ठ १२
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