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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) १० वीं कक्षा

टिप्पणी लिखिए। बिश्नोई चिपको आंदोलन - Science and Technology 2 [विज्ञान और प्रौद्योगिकी २]

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प्रश्न

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बिश्नोई चिपको आंदोलन

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

राजस्थान के जोधपूर जिले में खेजड़ी नामक एक गाँव है। जोधपुर शहर से 26 किमी की दूरी पर यह गाँव स्थित है। इस गाँव का नाम वहाँ पर पाई जाने वाली खेजड़ी वनस्पति के नाम पर रखा गया है। इसी गाँव में सर्वप्रथम बिश्नोई आंदोलन हुआ। बिश्नोई राजस्थान के जोधपुर जिले का एक समाज है। बिश्नोई समाज ने सन 1738 में खेजड़ी गाँव में चिपको आंदोलन जैसा ही एक आंदोलन किया था। इस गाँव की निवासी अमृतादेवी के नेतृत्व में 363 बिश्नोई लोगों ने वृक्षकटाई रोकने के लिए अपने प्राण न्योछावर किए थे। इन वृक्षों को बिश्नोई समाज पवित्र मानता है। सन 1738 के भाद्रपद महिने के शुक्ल पक्ष के दशमी के दिन अमृतादेवी और उनकी तीन पुत्रियों ने वृक्ष कटाई का विरोध किया। वहाँ राजा के सैनिक वृक्षों को काटने के लिए आये थे। राजा के नए महल को बनाने के लिए आवश्यक चुना तैयार करने के लिए उन्हें लकड़ियों की आवश्यकता थी। अमृता देवी और उनकी तीनों पुत्रियों ने वृक्षों को गले लगा लिया। दूसरे शब्दों में अमृतादेवी और उनकी तीनों पुत्रियाँ वृक्षों को बचाने के लिए वृक्षों से चिपक गयीं। अमृता देवी को वृक्ष से हटाने के लिए उन्हें रुपए देने का लालच भी दिया गया। परंतु अमृतादेवी अपने दृढ़ निश्चय के कारण वृक्ष से लिपटी रहीं। सैनिकों की धमकियों के आगे अमृतादेवी नहीं झुकी। "एक वृक्ष बचाने के लिए हमारे सिर भी काट दिए गए तो भी हम नहीं हटेंगे" ऐसा अमृता देवी कहती रहीं।
राजा के सैनिकों ने कुल्हाड़ी से अमृता देवी को मार डाला। अमृतादेवी के साथ ही उनकी पुत्रियों की भी हत्या कर दी गई। परंतु इन चारों ने वृक्षों की रक्षा के लिए अपना बलिदान दे दिया। आसपास के गाँवों में यह समाचार फैल गया। 83 गाँव के लोग इकट्ठा हो गए। 363 लोग वृक्षों की रक्षा के लिए वृक्षों से लिपट गए। इन सभी 363 लोगों ने वृक्षों की रक्षा करने के लिए अपना बलिदान दिया। मुक वृक्षों की रक्षा करने के लिए लोग शहीद हो गए। राजा को अपने इस कृत्य पर गहरा पश्चाताप हुआ।
जोधपुर के राजा अभयसिंग ने बिश्नोई समाज से माफी मांगी। तत्पश्चात एक ताम्रपत्र पर उन्होंने लिखवाया कि : “यहाँ पर एक भी हरेभरे वृक्ष काटे नहीं जाएगें। एक भी प्राणी का शिकार नहीं किया जाएगा। बिश्नोई गाँव की सीमा में यदि कोई भी व्यक्ति इस प्रकार का कृत्य करता है तो उस पर कठोर कारवाई की जाएगी। यदि इस कृत्य में राजघराने का कोई व्यक्ति पाया गया तो उसे भी दंडित किया जाएगा।"बीसवीं सदी का उत्तर प्रदेश का चिपको आंदोलन, इस आंदोलन से प्रेरणा लेकर किया गया।

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पर्यावरण संवर्धन : हमारी सामाजिक जवाबदारी
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अध्याय 4: पर्यावरणीय व्यवस्थापन - स्वाध्याय [पृष्ठ ४६]

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बालभारती Vigyaan aur Prodyogiki 2 [Hindi] Standard 10 Maharashtra State Board
अध्याय 4 पर्यावरणीय व्यवस्थापन
स्वाध्याय | Q 3. आ. | पृष्ठ ४६
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