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प्रश्न
सोचिए कि कोई व्यक्ति आपकी किसी भूल पर हँस रहा है। ऐसे में आप क्या कहेंगे या क्या करेंगे ताकि उसे एहसास हो जाए कि इस बात पर हँसना ठीक नहीं है?
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उत्तर
मैं गुस्सा करके या बदले में हँसकर जवाब नहीं दूँगा, क्योंकि इससे बात और बिगड़ जाएगी। शांत रहकर मैं उससे कहूँगा, 'तुम्हारी इस हँसी से मुझे दुख हुआ है। गलती तो सबसे होती है, तुमसे भी हो सकती है। ज़रा सोचो, अगर कोई तुम्हारी भूल पर ऐसे हँसे, तो तुम्हें कैसा लगेगा?' इसके बाद मैं उसे समझाऊँगा कि हँसी कोई ऐसी होनी चाहिए जिससे सबको खुशी मिले, न कि किसी का दिल दुखे। किसी की भूल पर हँसने के बजाय उसकी मदद करनी चाहिए; इससे दोस्ती और सम्मान बढ़ता है। साथ ही, मैं दूसरों की हँसी पर ध्यान देने के बजाय अपना काम सहज भाव से करता रहूँगा। कवि की शिक्षा भी यही है; 'आगे को सुख होइ समुझि बीती सो बीती', अर्थात जो बीत गई उसे भूलकर आगे की भलाई सोचनी चाहिए। इससे मन में चैन रहता है और दुर्जनों (बुरे लोगों) की हँसी से कोई फर्क नहीं पड़ता।
