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प्रश्न
ऐसी दोनों स्थितियों में आपको कैसा लगता है और दूसरों को कैसा लगता होगा?
विस्तार में उत्तर
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उत्तर
जब कोई हमारी भूल या हमारे किसी कार्य पर हँसता है, तो हमें बहुत बुरा लगता है। मन दुखी हो जाता है, लज्जा आती है और कभी-कभी गुस्सा भी आता है। ऐसा लगता है जैसे हमारा मज़ाक उड़ाया गया हो। धीरे-धीरे आत्मविश्वास घटने लगता है और हम लोगों के सामने बोलने या कोई काम करने में झिझकने लगते हैं। कवि भी कहता है कि जग में हँसाए जाने वाले व्यक्ति के चित्त में चैन नहीं आता; उसे खान-पान, सम्मान और राग-रंग में भी आनंद नहीं मिलता। ठीक इसी तरह, जब हम किसी और पर हँसते हैं, तो उस व्यक्ति को भी उतना ही दुख होता होगा। वह भी शर्मिंदा, उदास और अकेला महसूस करता होगा। इसलिए किसी पर हँसने से पहले हमें यह अवश्य सोचना चाहिए कि उसकी जगह हम होते तो हमें कैसा लगता।
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