हिंदी

स्कूल के काम से बचने के लिए मोहन ने कई बार पेट में ऐसे-ऐसे’ होने के बहाने बनाए। मान लो, एक बार उसे सचमुच पेट में दर्द हो गया और उसकी बातों पर लोगों ने विश्वास नहीं किया, तब मोहन पर क्या बीती होगी? - Hindi (हिंदी)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

स्कूल के काम से बचने के लिए मोहन ने कई बार पेट में ऐसे-ऐसे’ होने के बहाने बनाए। मान लो, एक बार उसे सचमुच पेट में दर्द हो गया और उसकी बातों पर लोगों ने विश्वास नहीं किया, तब मोहन पर क्या बीती होगी?

टिप्पणी लिखिए
Advertisements

उत्तर

स्कूल के काम से बचने के लिए मोहन ने कई बार पेट में ऐसे-ऐसे’ होने के बहाने बनाए। यदि किसी दिन मोहन को सचमुच पेट में दर्द हो गया तो कोई भी उसकी बात को नहीं मानेगा तथा उसका दर्द बढ़ता जाएगा जो कि परेशानी का कारण बन सकता है। यदि किसी दिन मोहन के पेट में सचमुच दर्द हुआ होगा तो लोगों ने उस पर विश्वास नहीं किया हो और यही समझा होगा कि वह बहाने बना रहा है। ऐसे में वह तड़पा होगा और सबको बार-बार कहा होगा कि उसके पेट में सचमुच दर्द हो रहा है। तब जाकर मोहन को पता चला होगा कि झूठ बोलने से क्या नुकसान होता है। उसे अपनी आदत पर पछतावा होगा और संभवतः वह भविष्य में कभी झूठ बोलने से तौबा कर ले।

shaalaa.com
गद्य (Prose) (Class 6)
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 8: ऐसे-ऐसे - अनुमान और कल्पना [पृष्ठ ५७]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Vasant Part 1 Class 6
अध्याय 8 ऐसे-ऐसे
अनुमान और कल्पना | Q 1 | पृष्ठ ५७

संबंधित प्रश्न

विश्वामित्र और कैकेयी दोनों ही दशरथ को रघुकुल के वचन निभाने की प्रथा याद दिलाते हैं।

तुम अपने अनुभवों की मदद से बताओ कि क्या दिया हुआ वचन निभाना हमेशा संभव होता है?


अपने बचपन की किसी मनमोहक घटना को याद करके विस्तार से लिखो।


अगर तुम्हें अपनी पोशाक बनाने को कहा जाए तो कैसी पोशाक बनाओगे और पोशाक बनाते समय किन बातों का ध्यान रखोगे? अपनी कल्पना से पोशाक का डिज़ाइन बनाओ।


बहुविकल्पीय प्रश्न:

लेखिका बचपन में इतवार की सुबह क्या काम करती थी?


बहुविकल्पीय प्रश्न:

लेखिका का जन्म किस सदी में हुआ था?


टोपी के संबंध में लेखिका क्या सोचती थी?


‘सागर ने रस्ता छोड़ा, परबत ने सीस झुकाया’-साहिर ने ऐसा क्यों कहा है? लिखो।


कल गैरों की खातिर की, आज अपनी खातिर करना”-
इस वाक्य को गीतकार इस प्रकार कहना चाहता है
(तुमने) कल गैरों की खातिर (मेहनत) की, आज (तुम) अपनी खातिर करना।

इस वाक्य में ‘तुम’ कर्ता है जो गीत की पंक्ति में छंद बनाए रखने के लिए हटा दिया गया है। उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘अपनी’ का प्रयोग कर्ता ‘तुम’ के लिए हो रहा है, इसलिए यह सर्वनाम है। ऐसे सर्वनाम जो अपने आप के बारे में बताएँ निजवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। (निज का अर्थ ‘अपना’ होता है।)
निजवाचक सर्वनाम के तीन प्रकार होते हैं जो नीचे दिए वाक्यों में रेखांकित हैं-
मैं अपने आप (या आप) घर चली जाऊँगी।
बब्बन अपना काम खुद करता है।
सुधा ने अपने लिए कुछ नहीं खरीदा।
अब तुम भी निजवाचक सर्वनाम के निम्नलिखित रूपों का वाक्यों में प्रयोग करो।

  1. अपने को
  2. अपने से
  3. अपना
  4. अपने पर
  5. अपने लिए
  6. आपस में

टिकट-अलबम का शौक रखने के राजप्पा और नागराजन के तरीके में क्या फ़र्क है? तुम अपने शौक के लिए कौन-सा तरीका अपनाओगे ?


वैद्य जी ने मोहन को देखने के बाद क्या कहा?


मोहन की हालत देख माँ क्यों अधिक परेशान थी?


डॉक्टर मोहने को क्या बीमारी बताते हैं और ठीक होने का क्या आश्वासन देते हैं?


मान लो कि स्कूल में तुम्हारी कोई प्रिय चीज़ खो गई है। तुम चाहते हो कि जिसे वह चीज़ मिले वह तुम्हें लौटा दे। इस संबंध में स्कूल के बोर्ड पर लगाने के लिए एक नोटिस तैयार करो निम्नलिखित बिंदु हों
(क) खोई हुई चीज़।
(ख) कहाँ खोई ?
(ग) मिल जाने पर कहाँ लौटाई जाए?
(घ) नोटिस लगाने वाले/वाली का नाम और कक्षा।


कुढ़ता चेहरा ईष्र्यालु चेहरा घमंडी चेहरा अपमानित चेहरा
भूखा चेहरना चालबाज़ चेहरा भयभीत चेहरा

रूआँसा चेहरा

इन भावों को अभिव्यक्त करके दिखाओ।


बहुविकल्पीय प्रश्न
नागराजन के मामा कहाँ रहते थे?

कान से न सुन पाने पर आस-पास की दुनिया कैसी लगती होगी? इस पर टिप्पणी लिखो और कक्षा में पढ़कर सुनाओ।


दुनिया का हाल जानने के लिए किस बात का ध्यान रखना पड़ेगा?


एक रोड़ा दरिया में लुढ़कता-लुढ़कता किस रूप में बदल जाता है?


  1. इस तसवीर में तुम्हारी पहली नज़र कहाँ जाती है?
  2. गली में क्या-क्या चीजें हैं?
  3. इस गली में हमें कौन-कौन सी आवाजें सुनाई देती होंगी?
    सुबह के वक्त दोपहर के वक्त
    शाम के वक्त रात के वक्त
  4. अलग-अलग समय में ये गली कैसे बदलती होगी?
  5. ये तारें गली को कहाँ-कहाँ जोड़ती होंगी?
  6. साइकिलवाला कहाँ से आकर कहाँ जा रहा होगा?

Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×