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प्रश्न
सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को संकलित करके वर्षा-गीतों की एक पुस्तिका भी तैयार कीजिए।
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उत्तर
i.सावन आया
सावन आया, मेघ घिराए,
धरती ने फिर रूप सजाए।
रिमझिम बूँदें गिरती जाएँ,
मन में नई उमंग जगाएँ।
विशेष: यह गीत सावन के आगमन और वर्षा की फुहारों से फैलने वाली प्रसन्नता को व्यक्त करता है।
ii. मोर का नर्तन
मोर पंख फैलाकर नाचे,
बादल देख हर्षित हो जाए।
ठंडी-ठंडी हवा जो बहती,
प्रकृति मधुर संदेश सुनाए।
विशेष: इस गीत में वर्षा ऋतु में मोर के नृत्य और प्रकृति की सुंदरता का सुंदर चित्रण किया गया है।
iii. बरखा की फुहार
बरखा आई, खुशियाँ लाई,
सूखी धरती हरी बन आई।
खेतों में फिर जान समाई,
किसान के मुख पर हँसी छाई।
विशेष: यह गीत वर्षा से धरती, खेतों और किसानों के जीवन में आने वाली ताजगी और खुशी को दर्शाता है।
iv. जल की बूँदें
जल की बूँदें मोती जैसी,
धूल भरी राहें धुल जातीं।
नदियाँ, ताल, पोखर भरते,
सूखी कलियाँ फिर मुस्कातीं।
विशेष: यह गीत वर्षा की बूँदों के प्रभाव, जल-संचय और प्रकृति के नवजीवन को व्यक्त करता है।
