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प्रश्न
साक्षात्कार में से चुनकर एक वाक्य नीचे दिया गया है। इसे ध्यान से पढ़िए और इस पर विचार कीजिए। आपको इसका क्या अर्थ समझ में आया? अपना विचार लिखिए।
“नृत्य में शरीर, ध्यान और तपस्या का साधन होता है।”
विस्तार में उत्तर
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उत्तर
इस पंक्ति का अर्थ है कि नृत्य सिर्फ शरीर की हरकत या मनोरंजन भर नहीं है, बल्कि यह एक साधना है। नर्तक अपने शरीर को ध्यान (गहरी एकाग्रता) और तपस्या (कठोर अभ्यास व संयम) का साधन बनाकर नृत्य करता है। जिस प्रकार साधक अपने तन-मन से ईश्वर की प्राप्ति के लिए तप करता है, उसी प्रकार नर्तक भी अपने शरीर, मन और आत्मा का पूरा समर्पण करके नृत्य के माध्यम से उस अदृश्य शक्ति से जुड़ता है। बिरजू महाराज के शब्दों में नृत्य करना एक तरह से अदृश्य शक्ति को निमंत्रण देना है: ‘कृष्ण, मेरे अंदर समाओ और नाचो।’ इसलिए नृत्य में भक्ति, श्रद्धा और तन-मन का पूर्ण समर्पण जरूरी है।
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