Advertisements
Advertisements
प्रश्न
‘साहस को अधीन करने की अभिलाषा करना पागलपन है’, कथन की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
Advertisements
उत्तर
कोई भी शक्ति किसी साहसी व्यक्ति, जाति तथा राष्ट्र के साहस को अधीन नहीं बना सकती। साहसिकता वीर पुरुष का लक्षण हैं। संसार का इतिहास उन्हीं लोगों के नामों से प्रकाशित है, जिन्होंन समय की छाती पर अपने साहस की मुहर लगाई है। साहस शरीर का बल नहीं, आत्मा की शक्ति का नाम है। जब व्यक्ति की यह शक्ति जागृत होती है, तब समाज में हलचल प्रारंभ हो जाती है। इसलिए किसी व्यक्ति, या राज्य द्वारा साहस को अधीन करने की अभिलाषा करना उसका पागलपन है। गांधीजी का जब आंतरिक साहस जागृत हुआ, तो उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन चलाकर अंग्रेजों को भारत से भगा दिया।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
किसी ऐतिहासिक घटना पर संवाद लिखिए तथा कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
सेना में भर्ती होने के लिए आवश्यक जानकारी अंतरजाल से प्राप्त कीजिए।
प्रत्येक राजपूत को ______
इस दुर्ग में कोई तो हमारा ______
वीरसिंह और उसके मुट्ठी भर साथी अभी तक ______
महाराणा की प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए चारणी द्वारा सुझाया गया उपाय।
अपनी मातृभूमि को लेकर वीरसिंह के विचार।
‘आज इस विजय में मेरी सबसे बड़ी पराजय हुई है’ महाराणा के इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक संबंधी कहानी पढ़िए और उसके साहस की विशेषता बताइए।
'मातृभूमि का मान' इस पाठ का केंद्रीय भाव लिखिए।
