Advertisements
Advertisements
प्रश्न
रूमाल के साथ बिना कुछ बाँधे इसे और ऊँचा कैसे उछाला जा सकता है?
Advertisements
उत्तर
बिना कुछ बाँधे केवल छोटी सी तह बनाकर उछाला जा सकता है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
सेठ ने किस रंग में कपड़ा रंगने को कहा?
नीचे के वाक्य में कुछ हरी-भरी सब्ज़ि का नाम छुपा हैं। ढूँढ़ो तो ज़रा –
मामू लीला मौसी कहाँ है?
नीचे के वाक्य में कुछ हरी-भरी सब्ज़ि का नाम छुपा हैं। ढूँढ़ो तो ज़रा –
शीला के पास बैग नहीं है।
नीचे के वाक्य में कुछ हरी-भरी सब्ज़ि का नाम छुपा हैं। ढूँढ़ो तो ज़रा –
रानी बोली – हमसे मत बोलो।
सही जोड़ो मिलाओ।

विद्यालय, गुरुजी, छुट्टी, बंदर, डंडा, पेड़, केला, ताली, बच्चे, भूख। इन शब्दों को पढ़कर तुम्हारे मन में कुछ बातें आई होंगी। इन सब चीज़ों के बारे में एक छोटी-सी कहानी बनाओ और अपने साथियों को सुनाओ।
जिन शब्द के नीचे रेखा खिंची है, उसका मतलब बताओ –
मुझे बैंगनी रंग कतई अच्छा नहीं लगता।
जिन शब्द के नीचे रेखा खिंची है, उसका मतलब बताओ –
अवंती ने सेठ का मंसूबा भाँप लिया।
जिन शब्द के नीचे रेखा खिंची है, उसका मतलब बताओ –
मैं तुम्हारा हुनर देखना चाहता हूँ।
जिन शब्द के नीचे रेखा खिंची है, उसका मतलब बताओ –
सेठ बुलंद आवाज़ में बोला।
जिन शब्द के नीचे रेखा खिंची है, उसका मतलब बताओ –
सेठ को ईर्ष्या होने लगी।
आफ़ंती के बारे में कुछ वाक्य लिखो। तुम उसके कपड़ों, शक्ल-सूरत, पालतू पशु, बुद्धि आदि के बारे में बता सकती हो।
दिन – दीन मेला – मैला।
ऊपर दिए गए शब्दों के जोड़ों में केवल एक मात्रा बदली गई है। किसी भी मात्रा को बदलने से अर्थ भी बदल जाता है। ऐसे और जोड़े बनाओ। देखें, कौन सबसे ज़्यादा जोड़े ढूँढ़ पाता है।
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
कब आऊँ वाले किस्से को चित्रकथा के रूप में लिखो।
कभी-कभी हम अपनी बात करते हुए ऐसे शब्द भी बोल देते हैं, जिनकी कोई ज़रूरत नहीं होती। इसी तरह इस वाक्य में कुछ शब्द फ़ालतू हैं। उसे ढूँढ़कर अलग करो –
बाज़ार से हरा धनिया पत्ती भी ले आना।
कभी-कभी हम अपनी बात करते हुए ऐसे शब्द भी बोल देते हैं, जिनकी कोई ज़रूरत नहीं होती। इसी तरह इस वाक्य में कुछ शब्द फ़ालतू हैं। उसे ढूँढ़कर अलग करो –
एक पीला पका पपीता काट लो।
कभी-कभी हम अपनी बात करते हुए ऐसे शब्द भी बोल देते हैं, जिनकी कोई ज़रूरत नहीं होती। इसी तरह इस वाक्य में कुछ शब्द फ़ालतू हैं। उसे ढूँढ़कर अलग करो –
अरे! रस में इतनी सारी ठंडी बर्फ़ क्यों डाल दी?
कभी-कभी हम अपनी बात करते हुए ऐसे शब्द भी बोल देते हैं, जिनकी कोई ज़रूरत नहीं होती। इसी तरह इस वाक्य में कुछ शब्द फ़ालतू हैं। उसे ढूँढ़कर अलग करो –
ज़ेबा, बगीचे से दो ताज़े नीबू तोड़ लो।
