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'पूरक पाठ्‌य-पुस्तक' के पाठ पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए: 'माता का अँचल' पाठ जैसा वात्सल्य क्या वर्तमान की भागती-सी व्यस्त जिंदगी में भी देखने को - Hindi Course - A

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प्रश्न

'पूरक पाठ्‌य-पुस्तक' के पाठ पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए:

'माता का अँचल' पाठ जैसा वात्सल्य क्या वर्तमान की भागती-सी व्यस्त जिंदगी में भी देखने को मिलता है? इस प्रश्न के उत्तर में उपयुक्त तर्क भी दीजिए।

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

'माता का अँचल' पाठ जैसा वात्सल्य, वर्तमान की भागती-सी व्यस्त जिंदगी में कम देखने को मिलता है, लेकिन पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। लेखक माता-पिता के वात्सल्यपूर्ण छाँव में बड़ा होता है, लेकिन आजकल की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में ऐसा वात्सल्य दिखाई नहीं देता। एकल परिवारों के चलन के कारण अक्सर घर में केवल कामकाजी माता-पिता ही होते हैं। अपने-अपने काम के दबाव और तनाव के चलते माता-पिता की मनोदशा ऐसी नहीं रहती कि वे बच्चों के साथ ज्यादा समय बिता सकें। फिर भी, तकनीक और नई सोच के माध्यम से माता-पिता आज भी अपने बच्चों की भलाई और परवरिश के प्रति गंभीर रहते हैं। अब, दो-ढाई साल की उम्र से ही बच्चों को प्री-प्राइमरी स्कूल भेजा जाने लगता है और उन पर शिक्षा, परीक्षा, और करियर का भारी दबाव रहता है। आज के बच्चे दादा-दादी, नाना-नानी के स्नेह और प्रकृति के सान्निध्य से भी वंचित हो रहे हैं।

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